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' आखिर कब तक चलता रहेगा सिलसिला ! '

 

 

Mohan Morya        आपने बहुत कुछ देखा सुना होगा लेकिन कुछ सिलसिले ऐसे होते है । जिनका जिकर सुनने में भी अजीब लगता हैं । सुनते ही दिलों दिमाग में हलचल सी मचने लगती है । अगर कोई गिरता है तो हम उसको उठाते है उसकी मदद करते है । लेकिन यहॉ पर गिरे हुए को और ज्यादा गहरा जख्म देते है । फिर बताओं उसकी हालात कैसे सुधरेंगी । ऐसी हालात बंया करता रैगर समाज में, जो लोग एक-दुसरे की टांग खिंचाई करते है उनकी सोच विचार का । यहॉं पर भी रैगर समाज में एक ऐसा ही सिलसिला जो खत्म होने का नाम ही नही लेता ऐसे सिलसले के लिए ना तो कोई मजबूत कदम उठाता है और ना कोई उस पर ध्यान देता है । हम बात कर रहे हैं रैगर समाज में टांग खिंचाई के सिलसले की । आपको कुछ नही करना है सिर्फ अपनी सोच को बदलना है, अपने आपको बदलना है, अपने आस पास के माहोल को बदलना है, जिसने भी अपने दिलों दिमाग में यह बात उतार ली फिर देखिए, जिस दिन यह परिर्वतन हो गया तो समाज का उद्वार अवश्‍य हो जायेगा । फिर देखिये रैगर समाज का नया सवेरा किस तरह से उजाला लाता है । हर समारोह, सम्मेलन, बैठक, शादी पार्टीयों में रैगर समाज के लोग, जब सामाजिक बातें करते है तो यह सुना जाता है कि हमारे समाज में जब तक टांग खिंचाई बंद नही होगी तब तक समाज का विकास नही होगा । आखिर यह टांग खिंचाई का सिलसिला कब तक चलता रहेगा ? क्यों करते यह लोग टांग खिंचाई की बात ? टांग खिंचाई करने से इन लोगों को क्या मिलता है ? टांग खिंचाई करने वालो से क्यों डरते हो? समय का नियम है परिवर्तन । समय के अनुसार परिवर्तन होना चाहिए । हर गांव, शहर, नगर, मोहल्ला, समाज, परिवार, घर, समुदाय, वर्ग इत्यादि सभी में परिवर्तन होता रहता है । फिर हमारे समाज में परिवर्तन क्यों नही हो सकता । अब समय टांग खिंचाई का नही है अब हम सबको मिलकर आगें बढ़ना है । क्योंकि जब दो लोग आपस में टांग खिंचाई करते है तो उनका फायदा सर्वण लोग उठाते है । समाज के लोगों को टांग खिंचाई की बात को छोड कर समाज के विकास की ओंर ध्यान देना चाहिए । व्यक्ति की सोच हमेशा सकारात्मक होनी चाहिए । हमारे समाज के लोग एक दुसरे की टांग खिंचाई करते है ऐसा भी सुना है । जो लोग टांग खिंचाई करते है वे लोग बुहत छोटी सोच रखते है । हमारे समाज में अगर कोई समिति, संस्था में किसी को पदाधिकारी बनाते है तो कई लोगो की ऐसी सोच रहती है यह क्यों मैं क्यो नही । जिस दिन यह मैं की भावना निकल जायेगी तब संगठन, संस्थाओं का विकास होगा और समाज को एक नई पहचान मिल सकेगी । आज के परिवेश में हर समाज आगें बढ़ रहा है । फिर हम ही पीछे क्यों ? आखिर ऐसी कौनसी कमी है जिस की वजह से हम लोग आगें नही बढ़ पाते । इस टांग खिंचाई की वजह से हमारा राजनितिक मंच देखने को नही मिलता । उसका कारण है कि मैंन अपनी ऑंखो से देखा था कि अभी जब सरपंचो का चुनाव हुआ तो कई जगह से एसी की सीट थी लेकिन उन जगहो से कई रैगर भाई खडे हुए और उसका नतीजा यह निकला कोई दावेदारी नही जता सका । सीट पर कब्जा किसी ओर ने ही पा लिया । कई जगह पंचायत भी हुई की एक ही रैगर उम्मीदवार को खडा करते है परन्तु दुसरा उम्मीदवार का कहना था कि यही क्यों मैं क्यों नही । ऐसी मानसिकता की वजह से ही समाज आज राजनीति में पिछे है । अगर कोई विद्यार्थी राजनीति करता है तो हम लोग उसको प्रोत्साहन करने की बजाह उसका मनोबल तोड़ते है । कहते है पहले अपनी पढ़ाई कर फिर राजनीति के बारे मे सोचना अगर उसकी रूचि राजनीति करने की है तो उसको राजनीति करने दो । उसका मनोबल बढ़ाओं और समय समय पर उसको प्रेरित करते रहो । और भी ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते है । अगर आप कोई भी अच्छा काम करने जा रहे है तो यह स्वाभाविक है कि उसकी प्रशंसा व लोचना दोनो ही होती है । आपको तो अपने कार्य के प्रति सजग रहना है । हमारे समाज के लोगों को किसी के सार्वजनिक या निजी कार्य मे अगर कही जरा सी भी कमी या सुराग मिल जाये फिर देखो उसको कैसे सुर्खियों में लाते हैं । जबकि ऐसा नही होना चाहिए । इस बात का इतिहास गवाह है कि गलति इंसान से ही होती है और गलतियों का सुधार भी इंसान के द्वारा ही होता है । लेकिन हमारे समाज में कई लोग ऐसे है कि जब तक किसी कि टांग खिंचाई नही करे तब तक उनको नींद नही आती । एक पुरानी कहावत है कि मेंढ़क पानी से राजी गुरबेडा गोबर से राजी और चुगल खोर चुगली से राजी । हमारे ही समाज के कई लोग हमारे समाज को केकड़ा कि संज्ञा देते है उनका मानना है कि जिस तरह एक केकड़ा ऊपर चढ़ता है तो दुसरा केकड़ा उसकी टांग पकड कर खिंच लेता है और उसे निचे गिरा देता है । उसी तरह हमारे समाज के लोग एक-दुसरे की टांग खिंचाई करते रहते है । एक-दुसरे की टांग पकड कर खिंचने की जो नीति लोग अपनाते है वे लोग खुद कोई काम करते नही और दुसरो को कोई काम करने देते नही ।फिर बताओं समाज का विकास कैसे सम्भव है । माना कि षिक्षा के क्षेत्र में हमारे समाज ने अच्छा परचम लहराया है,काफी विकास किया है । परन्तु जब शिक्षित लोग ही ऐसा करते है तो आम आदमी की तो हसीयत क्या । यह तो आप भी जानते है कि शिक्षित व्यक्ति ही ज्यादा तर्क-विर्तक करता है ।
       कटु सत्य हमेशा कड़वा लगता है । शिक्षित, बुद्धिजीवी, समाजसेवी, अधिकारी, राजनीतिज्ञ, लोग ही समाज में सुधार लाते है । और यह लोग समाज में टांग खिंचाई करते है । इस टांग खिंचाई का जिता जागता उदाहरण है कि अखिल भारतीय रैगर महासभा में सिमित लोगों कें द्वारा ही मतदान करना, क्यों ना इनकी संख्या बढ़ाई जाए । फिर बताओं समाज का विकास कैसे सम्भव है । कई लोग मानते है कि हमारे समाज में काफी सुधार हुआ है लेकिन मेरा मानना है कि अभी तो काफी सुधार होना बाकी है । आज भी हमारे ऊपर अत्याचार होते है । देश आजाद हो गया परन्तु अभी तक पुर्ण रूप से हम आजाद नही हुए है । आज भी रैगरो के साथ कई जगह षोषण होता है । भविष्य में ऐसे ही टांग खिंचाई होती रही तो रैगर समाज का सांसद बना भी मुशकील लग रहा है । क्या आपको लगता है कि रैगर समाज से अगला सांसद होगा ? क्योंकि जब तक हम लोग राजनीति में चेतना जाग्रत नही करेगें तब तक अपना सांसद बनना मुष्किल लगता है । किनती दुखदायक बात कि आज हमारे समाज में एक भी सांसद नही है । हर समाज में आपको एक या दो सांसद अवश्‍य मिल जायेगे । कई लोग कहते है कि हमारे समाज का तो भगवान ही मालिक है और यह बात सही भी है ।

 

raigar writerलेखक

मोहन लाल मौर्य (पत्रकार)

महासचिव- जिला युवा रैगर समाज अलवर
ग्राम पोस्ट चतरपुरा, तहः बानसुर, जिला अलवर, 301024 (राज.)

 

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