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दिनांक 11-01-2013

‘‘हमारा प्रतिनिधि, जो हमारी बात करे’’

 

 

Kushal Raigar

       आजाद भारत में जब बाबा साहेब डॉ.अम्बेडकर ने संवैधानिक रूप से, संविधान सभा में जब नोकरीयों में आरक्षण का प्रावधान करना चाहा तो उनका बहुत विरोध किया गया और तब यह कहा गया कि आरक्षण से कार्यकुशलता, कार्यक्षमता में गिरावट आयेगी, तो इसका जवाब देते हुए बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि, कार्यक्षम सरकार से बेहतर प्रतिनिधि सरकार होती है । उन्होंने कहा कि आप बुद्धिमान हो सकते हैं, आप कार्यक्षम हो सकते हैं, यह सही है लेकिन आप ईमानदार हो सकते हैं इस बात पर मुझे शक है । मान भी लिया जाए कि तुम ईमानदार भी हो सकते हो लेकिन आप मेंरे प्रतिनिधि नहीं हो सकते । हमारा प्रतिनिधि केवल हमारा होगा । दूसरा कोई और नहीं हो सकता ।

       लोकतंत्र क्या है ? सवा सौ करोड़ के लोगों के 543 प्रतिनिधि संसद में जाते हैं अर्थात् लोकतंत्र कुछ नही प्रतिनिधि व्यवस्था है । बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर ने आरक्षण का विरोध करने वालों को चुनौती दी कि यदि आप लोकतंत्र को मानते हैं तो आप प्रतिनिधित्व को नकारते हैं, तो आप लोकतंत्र को नही मानते । इस प्रकार से बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की दलीलों से आरक्षण का विरोध करने वालों को, आरक्षण का विरोध करना मुश्किल हो गया ।

       वर्तमान या विगत वर्षों पर नजर डाले तो साफ नजर आता है कि, जो हमारा प्रतिनिधि होगा वो हमारी बात करेगा । जहा तक भारत देश की संयुक्त निर्वाचन प्रणाली की बात है, इस पर बाबा साहेब ने साफ कहा है कि, इससे दलाल, एजेण्ट पैदा होते हैं, जो सच्चे प्रतिनिधि नही हो सकते, क्‍योंकि प्रतिनिधियों की नियुक्ति राष्ट्रीय पार्टियों के प्रमुख करते हैं, जनता उन्हे नही चुनती । तो आप कहेगे की, वोट तो हम देते हैं, प्रश्न यह है कि, जिन्हे हम वोट देते हैं, उसका चुनाव पार्टी अध्यक्ष करते हैं । पार्टी अध्यक्ष उन लोगों को चुनाव का टिकट देते हैं, जो उनके यस मेंन हो, या जो उनकी चापलूसी करते हैं, उनके वफादार हो । इसलिए केवल हमारे वोट देने से वो हमारे प्रतिनिधि नही हो जाते हैं । पहले वे पार्टी के प्रतिनिधि है, उसके बाद हमारे प्रतिनिधि है । ऐसा आप कह सकते हैं, लेकिन यह हमारे सच्चे प्रतिनिधि नही कहे जा सकते ।

       विगत वर्षों पर नजर डाले तो साफ दिखाई देता है । देश में कानून की तरह प्रतिनिधि तो बहुत है, लेकिन इसमें अधिकतर लगडे., गूंगे, बहरे है, जो आप और हमारे काम के नही है । यदि काम के होते तो, हमारा समाज इतना पिछड़ा नही होता ।

       इसी तरह जब संविधान सभा में नोकरी में आरक्षण पर बहस हुई तो डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि ‘‘दलित आदिवासी सरकारी कर्मचारी पहले अपने समाज के प्रतिनिधि है । उसके बाद सरकार के नोकर’’ । इसलिए समाज के पिछड़ेपन के लिए समाज और परिवार के होनहार, बुद्विमान, बडे़ अफसर भी जिम्मेंवार है, क्‍योंकि जो हमारा होगा वो हमारी बात करेगा । जिसका जीता जागता उदाहरण बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर रहे हैं । जिन्होने अपने गरीब पिछड़ो के लिए, अपना पूरा जीवन लड़ते-लड़ते गुजार दिया ।

       कुछ वर्षों पूर्व की बात करे तो, डॉ. अम्बेडकर के बाद कोई सही मायने में दलित आदीवासी पिछड़ो का सच्चा प्रतिनिधी रहा है तो, वह मान्यवर श्री काशीराम जी थे । उन्होने दलित आदरवासी पिछड़ो को सत्ता की ताकत और चमक से अवगत कराया । उन्ही के प्रयासों का परिणाम है कि, चार बार मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी । नतीजा आपके सामने हैं । दलितों आदिवासीयों में एक नयी राजनैतिक चेतना का प्रादुर्भाव हुआ और महाराष्ट्र राज्य के बाद दलित आदिवासीयों का सबसे ज्यादा सामाजिक व राजनैतिक विकास उत्तर प्रदेश में हुआ है, यही हमारी असली प्रतिनिधि है ।

       महान इतिहासकारों ने कहा कि किसी को गुलाम बनाना है तो, उसका इतिहास मिटा दो, वह स्वतः ही गुलाम बन जायेगा, क्‍योंकि स्वर्णतम इतिहास हमेंशा प्रेरणास्त्रोत रहता है । भारत देश में सबसे पहले विदेशी आर्य, भारत में आये, जिन्हे ब्राह्यण कहा जाता है । इन्होंने ने राजसत्ता पर कब्जा कर बौद्ध धर्म को मिटाने का कार्य किया और बौद्ध धर्मी नागरिकों को हिन्दुधर्मी कह कर प्रचारित किया तथा बौद्ध धर्म को मिटाने के लिए अनेक अनेतिक हथकंडो का सहारा लिया, जिसका इतिहास गवाह है ।

       फिर मुगलकाल में मुगलों ने भी इसी तरह हिन्दुओं पर दबाव बनाकर मुस्लिम धर्म को बढ़ावा दिया और अंग्रेजों ने हिन्दु-मुस्लिम को बॉटकर भारत पर राज किया और भारत को इण्डिया बना दिया ।
भारत से गया बोद्ध धर्म चीन-जापान-थाइलेंड आदि कई देशो में फेला । भारत प्रारम्भ में ही बोद्ध धर्म राष्ट्र रहा था, क्योंकि आप किसी को वही दे सकते हो, जो आपके पास अधिक और लोकप्रिय हो ।

       मान्यवर काशीराम जी के साथ ही मजबूत विचारक दलित पिछड़ों ने खो दिया, वे काशीराम जी ही थे, जिन्होने मण्डल कमीशन लागू करवा कर ओ.बी.सी. को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलवाया, क्योंकि वे हमारे प्रतिनिधि थे, इसलिए हमारे लिये सोचते थे । उनकी उत्तराधिकारी आजकल मायावती उनके कारवे को आगे बढा रही है, वो मर्दों की अकेली महिला कमाण्डर है । वर्तमान परिस्थितियों पर गोर करे तो स्पष्ट नजर आता है, यही हमारी असली प्रतिनिधि है ।

       देश की संसद उन लोगों के हितों के लिये काम करती है, जिनके सच्चे प्रतिनिधि संसद में मोजूद हो । वर्तमान ज्वलंत मुद्दे पर बात करे तो, महाराष्ट्र, मुम्बई में इन्दु मिल की भूमि बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर स्मारक के लिए देने का मामला हो तथा पदोन्नति में आरक्षण का मामला कांग्रेस, बी.जे.पी. के अनुसूचित जाति जनजाति सांसद की हिम्मत नही कि, इस मुद्दे को संसद में उठाये और दबाव बनाये, क्योंकि कांग्रेस, बी.जे.पी दलित आदीवासी सांसद, पार्टी के प्रतिनिधि है, अपने वर्ग के नहीं । वो कही न कही बंधक बनाये हुये है, जिससे की वो बोल नही सकते । ऐसी स्थिति में उन्हे हमारा प्रतिनिधि कैसे कहा जा सकता है, क्योंकि हमारा प्रतिनिधि हौगा, वो हमारी बात करेगा, जो हमारा नही, वो हमारी बात नही करेगा ।

       आज संसद में आरक्षण के हिसाब से 28 प्रतिशत लगभग हमारे 160 सांसद है जबकि केवल 21 सांसदों वाली, दलित महारानी मायावती ही बोल रही है, क्योंकि वह हमारी प्रतिनिधि है, और हमारी बात करती है । जिस तरह से पदोन्नति आरक्षण के मामले को कांग्रेस, बी.जे.पी. ने कटपूतली बना दिया है । दलित आदिवासीयों को नचा रहे हैं ।

       जब केन्द्र सरकार को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश ( एफ.डी.आई ) मुद्दे पर जब सरकार को बहुमत की जरूरत पड़ी तो सरकार सोदागर बन गई । एक हाथ दो, दूसरे हाथ लो, उसमें भी धोखे की सम्भावना । सरकार ने मुम्बई इन्दु मिल की साढे़ बारह एकड़ भूमि बाबा साहेब स्मारक के लिए देने की घोषणा की, और साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने सम्पूर्ण धन राशी उपलब्ध करवाये जाने की घोषणा कर दी । यह मायावती और हमारे सच्चे प्रतिनिधि का प्रभाव है, जो यह हुआ । नही तो यह मुद्दा, पिछले 40 वर्षों से अटका पड़ा था, क्योंकि पिछले 40 वर्षों से हमारे प्रतिनिधि इस मोल-भाव की हेसियत में नही थे, अब है तो, देखिये बात मानी जा रही है और पदोन्नति आरक्षण के मामले भी सरकार दबाव की मुद्रा में है, यह सरकार के गले कि फांस बना हुआ है, क्योंकि मायावती का दबाव काम कर रहा है और कुछ नही ।

       हमारे अपने लोग निजी हित में मायावती को कमजोर बनाने पर तुले हुए है और अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं । इन्हे समझाने की हमारी और आपकी जिम्मेंदारी है कि, हमारा कोनसा प्रतिनिधि असली है और कोनसा नकली है ।

       सत्ता की ताकत क्या है, जिस लखनऊ को नवाबों के शहर के नाम से जाना जाता है, वो शहर आजकल बाबा साहेब के स्मारकों के नाम से जाना जाता है । कोई लखनऊ जाये तो वह बाबा साहेब को अपने जीवन से ओझल नही कर सकता । एक बार तो सुनामी भी आ जाये, तो उन स्मारकों को हजारों सालों तक मिटाया नही जा सकता । यह केवल स्मारक नहीं, यह हमारा इतिहास है, इतिहास को देखकर, पढ़कर ही, इतिहास बनाया जा सकता है । ( जय भीम )

 

raigar writerलेखक

कुशाल चन्द्र रैगर, एडवोकेट

M.A., M.COM., LLM.,D.C.L.L., I.D.C.A.,C.A. INTER–I,

अध्यक्ष, रैगर जटिया समाज सेवा संस्था, पाली (राज.)

माबाईल नम्‍बर 9414244616

 

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