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' ‘रघुवंशी रक्षक पत्रिका ’ समाज की नई दिशा ! '

 

 

Mohan Morya        किसी भी अखबार की अपार सफलता के पिछे उसके पाठकों का हाथ होता हैं । इन्हीं कि बदोलत आज ‘रघुवंशी रक्षक पत्रिका’अपने ११ वें वर्ष में प्रवेश कर लिया है । पाठकों के अपार स्नेह व सहयोग ने ही । आज ‘रघुवंशी रक्षक पत्रिका’ को रैगर समाज की बुलंद आवाज बनकर उभारा है । पाठकों के प्रति पत्रिका परिवार हमेशा कृतज्ञ रहा हैं । और आगे भी रहेगा । उम्मीद है कि पाठक आगे भी इस स्नेह व सहयोग को यूं ही बनाये रखेंगे । कहते है कि तलवार की धार से ज्यादा ताकतवर कलम की ताकत होती है । पत्रिका के सम्पादक मुकेश कुमार रैगर, कि कलम अत्याचार, अन्याय, विश्वासघात, अश्पृश्यता, दलितों से भेदभाव, कुरीतियां, रूढि़वादी परम्पराओं के खिलाफ बिना किसी दबाव के निरंतर चलती रही । और सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षिक क्षेत्र में इनकी कलम ने सच के आईने से वाकिफ करवाया है । पत्रिका निष्पक्ष समाचारों के रूप में अपनी स्वच्छ छवि बनाए रखी है और और लोगों की अपेक्षाओं पर खरी उतरी है । समाज की छोटी से छोटी खबर को भी कवरेज कर पत्रिका में प्रकाशित किया । ये निष्पक्ष, निर्भीक, सजग कार्य की प्रतिष्ठा के धनी रहें है । समाचार, समीचीन आलेख, सटीक आलेख, लिखकर, पाठाकों के दिल मे जगह बनाई । पाठकों के विश्वास पर कभी चोट न आने दिया, उनके सुख दु:ख की घड़ी में डाल बनकर रक्षा की हैं । पत्रिका के लिए पाठक ही सब कुछ मायना रखते हैं, जिस तरह बिना पानी के मछली जीवत नहीं रह सकती उसी तरह पाठकों के बिना रघुवंशी पत्रिका अधूरी है । सामाजिक सरोकारों में इन्होंने हमेशा बढ़चढ़ कर भाग लिया हैं । गरीबी की चादर ओढ़े मुकेश कुमार रैगर ने विषम परिस्थितियों के सम्मुख ‘गाड़़ेगावलिया टाईम्स ’ अखबार निकाला, समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया । पर गाड़ेगावलिया टाईम्स का नाम इनके गौत्र के नाम से होने के कारण बंद करना पड़ा । लेकिन हिम्मत नहीं हारी, जिसने उडऩा सिखा हो, इरादे बुंलद हो, वह भला कैसे रूक सकता है । इनकों तो आगे बढऩा था । इनके दिल-दिमाग में एक ही बात बैठी हुई थी समाज सेवा एवं पत्रकारिता की । और इनकी ख्व्वाहिश भी यही थी । कहावत है कि ‘ डुबते को तिनके का सहारा ’ जो मुकेश कुमार रैगर पर पूरी तरह से चरितार्थ हुई । क्योंकि इस वक्त फरिश्ते के रूप में तत्कालीन आर ए एस अधिकारी वर्तमान में राजस्व विभाग में आईएएस बी.एल.नवल ने इनका हाथ थामा । और इन्हें के सिपहसलार से आगे बढऩे की प्रेरणा मिली । इनके कर कमलों द्वारा रघुवंशी रक्षक पत्रिका का शुभारम्भ हुआ । और साथ ही पत्रिका की शुरूआत से लेकर आज तक आशीर्वाद स्वरूप योगदान भी दिया है । उसके लिए नवल साहब को साधुवाद । छोटे से गांव बोराज, जयपुर से मुकेश कुमार रैगर ने इस पत्रिका को देश के गांव-गांव ढ़ाणी-ढ़ाणी तक पहुंचा कर सराहनीय कार्य किया है । बेखूबी साथ अपने कार्य को अंजाम देने वाले के प्रति हमारा भी थोड़ा सा दायित्व बनता है । इनके कार्य में हाथ बटाकर समाज में जन जागृति लाने का प्रयास करें । जिससे हमारे समाज का उत्थान हो और व्याप्त कुरीतियों, रूढि़वादी परम्पराओं पर अंकुश लग सकें । बुद्धिजीवी, समाजसेवी, राजनैतिक, नौकरशाही, लोगों से विनम्र है कि इस पत्रिका को मंगवाने का कष्ट करें । इससे संपादक की आर्थिक प्रगति में नहीं बल्कि इनके परिवार के लिए कुछ खुशी के क्षणों को व्यतीत करने में सहायक होगा ।

 

raigar writerलेखक

मोहन लाल मौर्य (पत्रकार)

महासचिव- जिला युवा रैगर समाज अलवर
ग्राम पोस्ट चतरपुरा, तहः बानसुर, जिला अलवर, 301024 (राज.)

 

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