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Atyachar

 

नीम्‍बाहेड़ा काण्‍ड : 5 जून, 1948

 

       स्‍थानी रैगर बंधुओं ने जयपुर महासम्‍मेलन के पारित प्रस्‍तावों को ध्‍यान में रखते हुए मुर्दा उठाना, मुर्दा खाल निकालना, बेगार देना आदि कुत्सित कार्यों से अपने आपको दूर करने का निश्‍चय किया । यह निश्‍चय स्‍थानीय नबाब को रूचिकर नहीं हुआ और उसने बेगार आदि की प्रथा को बनाये रखना चाहा । इनको अस्‍वीकार करने पर रैगर बंधुओं के साथ बुरा व्‍यवहार किया जाने लगा । महासभा की ओर से एक शिष्‍टमण्‍डल सर्व श्री नवल प्रभाकर, श्री सूर्यमल मौर्य, भोलाराम तोणगरिया, पं. घीसूलाल सवांसिया महाभुनावों को वहाँ पहुँचा, वस्‍तु स्थिति से अवगत हुए तनाव को कम करने का भरसक प्रयास किया एवं अन्‍तत: सफलता प्राप्‍त की ।

 

 

 

 

(साभार - रैगर कौन और क्‍या ?)

 

 

 

 

 

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