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nawal prabhakar jajoriya       अपनी कर्मठता, कुशलता, मेहनत, लगन व समर्पण से विरले लोग ही ऊंचाईयों को पा सकते है । ऐसे ही कर्त्तव्य निष्ठ आदर्श व्यक्तित्व के धनी श्री स्व. श्री नवल प्रभाकरजी जाजोरिया दिल्ली करोल बाग से प्रधम लोकसभा में रैगर समाज सांसद बन कर रैगर समाज का गौरव बढ़ाया ।

      स्व. श्री नवल प्रभाकरजी जाजोरिया अपने प्रारंभिक जीवन काल से ही समाज सेवा में सक्रिय भागीदारी निभाते आ रहे थे । आपने भारत की स्वतन्त्रता के लिए स्वतन्त्रता संग्राम आन्‍दोलन में भाग लिया और इसके साथ ही जाति सुधार में भी पूर्ण रुप से सक्रिय रहे । एक तरफ भारत छोड़ों आन्दोलन में भाग लेने के कारण कई महिनों तक जेल में बन्दी रहे ।

       सन् 1952 में प्रथम लोक सभा के सदस्य निर्वाचित हुए और लगातार तीन बार 1952, 1957, एवं 1962 मे दिल्ली के करोल बाग क्षैत्र से सर्वाधिक मतों से जीत अर्जित करते रहे । सन् 1967 में पहली बार लोक सभा का चुनाव जीत नहीं पाये ।

      तीसरे अखिल भारतीय रैगर महासम्मेलन, पुष्‍कर में श्री नवल प्रभाकरजी को सर्व सम्मती से अखिल भारतीय रैगर महासभा के अध्यक्ष पद पर मनोनीत हुए । अपने कार्यकाल में उन्होने जब-जब भी जातीय बन्धुओं पर किसी भी प्रकार की कठिनाई आई तो आप तुरन्त वहां जाकर उसका समाधान किया । समय-समय पर राजस्थान में जातिय बन्धुओं का हौंसला बढ़ाने में जगह-जगह सम्मेलनों का आयोजन कर समाज कल्‍याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । अखिल भारतीय रैगर महासभा के अध्‍यक्ष के पद पर आपका कार्यकाल 1964-1977 तक का रहा । इस दौरान आपने अपनी दूरदृष्‍टा सौच से सजातीय बन्‍ध्‍ुओं में चेतना जगाई ।

       आपकी प्रधानता के कार्य काल में राजस्थान में जितने विधान सभा के रैगर बंधु सदस्य रहे उतने फिर कभी नहीं बन सके और उनकी संख्या निरन्तर घटती गई ।

       28 अक्टूबर 1970 में हृदय गति के बन्‍द हो जाने से श्रद्धेय श्री नवल प्रकार जी के नाम का जाति माता का यह दैदीप्‍यमान सूर्य अस्‍त होगया और वे हमारा साथ छोड़कर स्‍वर्ग सिधार गये ।

       उनके मरणोपरान्त 1975 में रैगर महासभा ने आपको ताम्रपत्र से सम्मानीत किया रैगर समाज आपके सराहनीय कार्य को सदा याद रखेगी ।

 

(साभार- श्री गोविन्‍द जाटोलिया : सम्‍पादक - मासिक पत्रिका 'रैगर ज्‍योति')

 

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