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Raigar social worker

Sukha Raj Singh Arya Nogia        महान समाज सुधारक श्रद्धेय श्री सुखराज सिंह आर्य नोगिया जी का जन्‍म 22 मार्च, 1927 को ग्राम दौरार्इं, जिला अजमेर, राजस्‍थान में हुआ । पिता का नाम भागीरथ जी नोगिया थे जो मूलत: नैनवा जिला, बून्‍दी से आकर ग्राम दौरार्इं में बसे थे । आपकी माता जी का बचपन में ही स्‍वर्गवास हो गया था । आपका विवाह अजमेर निवासी चौ. लादूराम तगाया जी की सुपुत्री सुशीला देवी से से हुआ । श्री आर्य जी की स्‍कूली शिक्षा मीरशाह अली पाठशाला अजमेर में हुई । तत्‍पश्‍चात् आपने बी.ए. कर एल.एल.बी. की शिक्षा आपने पत्राचार से ग्रहण की । आपने शिक्षा ग्रहण करने के पश्‍चात् पोस्‍टमेन, केशियर तथा अध्‍यापक की नौकरी की । बाद में इन सेवाओं को छोड़कर 1943 में अमीन (राजस्‍व निरिक्षक) के पद पर सेवाएं दी । अमीन के रूप में आपका अंतिम पदस्‍थान भिनाई जिला अजमेर में रहा । नौकरी करने की दौरान ही आपका रूझान रैगर समाज की दशा और सामाजिक स्थिति से रूबरू हुए । उस समय अंग्रेजों के शासन काल में राजकीय नौकरी करते हुए राजकीय दौरे पर जाते समय घोड़े पर यात्रा करना होती थी लेकिन रैगर जाति के होने के कारण घोड़े पर बैठने को लेकर आपको जबरदस्‍त विरोध का सामना करना पड़ा ।

       दौसा एवम् जयपुर महासम्‍मेलनों में घृणित कार्य नहीं करने सम्‍बन्‍धी पारित प्रस्‍तावों की क्रियान्विति रैगर समाज के प्रत्‍येक गाँव-गाँव में धीरे-धीरे एक लहर के अपनुसर होने लग गई और महासम्‍मेलनों में इसी से बोखलाकर स्‍वर्णों ने रैगर जाति के लोगों पर अत्‍याचार करना प्रारम्‍भ कर दिया । रैगर जाति की समाजिक स्थिति व यह सब देखकर आपका मन द्रवित हो गया तथा आपने समाज सुधार करने के लिए अपनी नौकरी को त्‍याग दिया और मात्र 24-25 वर्ष की उम्र में ही तन-मन-धन से समाज सेवा के कार्य में जूट गए । तथा परिवार के भरणं-पोषण के हेतु अजमेर कचहरी में ही अर्जी नवीसी तथा भूमि सम्‍बन्‍धी छोटे-छोटे मुकदमों की पैरवी करने लगे ।

       श्री सुखराज सिंह आर्य जी ने इन विषम परिस्थितियों में अजमेर क्षेत्र में एक नई संस्‍था का गठन किया जिसका नाम ''श्री रैगर सुधारक कार्यकारिणी सभा'' था । जोकि एक रजिस्‍टर्ड संस्‍था थी । इस संगठन में 40 समाज सेवी व्‍यक्तियों का था जो गाँव-गाँव जाकर रैगर समाज के सजातीय बन्‍धुओं से चमड़े निकालने का कार्य पूर्ण रूप से बन्‍द करने के लिए समझाते थे तथा यह पुराना काम छोड़ने के लिए सख्‍ती से पेश आते थे । नोगिया जी का प्रथम कार्य महासम्‍मेलन में पारित प्रस्‍ताव नम्‍बर 1, 2 व 3 का पालन कर घृणित कार्य बन्‍द कराना था आपने जयपुर, अजमेर, केकड़ी, ब्‍यावर, भिनाई, देवली, सवाईमाधोपुर, करोली, झालावाड़, बून्‍दी, कोटा, जोधपुर, भीलवाड़ा, नागौर, दूदू, किशनगढ़ आदि क्षेत्रों में जाकर समाज सुधार कार्य किया । इस प्रकार नोगिया जी द्वारा संचालित रैगर सुधारक कार्यकारिणी द्वारा यह कार्यक्रम समाज में व्‍याप्‍त कुरीतियों को दूर करने, समाज सुधार करने तथा स्‍वर्णों के अत्‍याचारों से निबटने का बहुत ही र्स्‍वोत्तम कार्य था । आपके भाषणों से प्रभावित होकर सजा‍तीय बन्‍धुओं ने अपने अधिकांश बच्‍चों को शिक्षा दिलाने लगे तथा नशा व गंदी आदतों को भी छोड़ने लगे । इस तरह स्‍वर्णों के अत्‍याचारों से सुरक्षा भी हुई जिससे लोग राहत की सांस लेने लगे ।

       एक समय की बात है जब अजमेर व उसके आस-पास के किसान लोग रैगरों के घृणित काम बन्‍द करने के कारण काफी जले हुये थे । उन्‍होंने गुप्‍त मिटिंग करके रैगरों पर सामूहिक हमले की योजना बनाई । निश्चित तिथि पर एक ही दिन हरमाड़ा सराधना श्रीनगर गोविन्‍दगढ़ आदि सभी 210 गाँवों पर एक साथ हमला हुआ । रैगरों को मारा-पीटा, घर मकान तोड़ दिये व जला दिये गये कूओं को कचरे से भर दिया गया । फसल नष्‍ट कर दी गई व चमड़े के कारखानों को तोड़ दिया गया और भी बहुत नुकसान हो गया । सामूहिक आक्रमण के कारण पूरे अजमेर राज्‍य में त्राहि-त्राहि मच गई । श्री नोगिया जी ने अजमेर राज्‍य व भारत सरकार से सुरक्षा व शान्ति व्‍यवस्‍था कायम करने हेतु कार्यवाही की । तो अजमेर पुलिस ने स्‍वर्णों व किसानों के कहने पर श्री नोगिया एवं उनकी सभा के कार्यकर्ताओं पर ही अशान्ति फैलाने का आरोप लगाया और सी.आई.डी. जाँच चालू करा दी व कुछ लोगों को बन्‍द भी कर दिया । फिर श्री नोगिया जी व उनके साथी (श्री रूपचन्‍द जलुथरिया) बाबा साहेब डाक्‍टर भीमराव अम्‍बेडकर के पास गये । उन्‍होंने इनकी पूरी बात सुनकर सहायता की और भारत सरकार के गृह विभाग से रैगर समाज की सुरक्षा व पूर्ण शान्ति व्‍यवस्‍था कायम करने के आदेश भिजवाये जिसका तत्‍काल पालन किया गया और तब शान्ति कायम हुई ।

       सुखराज सिंह नोगिया जी प्रत्‍येक स्‍थान के पूरे कार्यक्रम का लिखित रिकार्ड रखते थे जिसमें सभा में कौन-कौन से कार्यकर्ता स्‍वयम् सेवक पंच प्रतिनिधि आये । सभाध्‍यक्ष कौन था पुलिस की क्‍या व्‍यवस्‍था थी । किन-किन समस्‍याओं का निराकरण हुआ । स्‍वर्णों में किन-किन से भेंट हुई और क्‍या निर्णय हुआ आदि बातों का पूरा विवरण वे रखते थे और हर सभा की अलग से फाइल होती थी ।

       रैगर जाति की स्त्रियों को स्‍वर्णों जातियों के बंदीश के कारण पीतल घातु के गहने पहना करती थी आपने रैगर जाति की स्त्रियों को पीतल के गहने पहनना छुडवाकर चाँदी की घातु के गहने पहनने का अधिकार दिलाया । रैगर जाति के बालक-बालिकाओं को शिक्षा दिलाने के लिए पूर्ण रूप से जोर देकर इस पूरे क्षेत्र में जोरदार प्रचार-प्रसार का अभियान चलाया । आपने सन् 1958 तक अपने संगठन को संगठित कर समाज सुधार का कार्य किया तत्‍पश्‍चात् आपने राजस्‍व कानून में वकालत आरम्‍भ की । इसी दौरान जनसंघ पार्टी से जुड़कर गायत्री जी महारानी जयपुर के साथ कार्य किया । आप अंतिम समय तक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे ।

      एक व दो नम्‍बर का काम पूरा हो जाने के पश्‍चात् भी वे रैगर समाज की सामाजिक गतिविधियों से जुडे रहे और उन्‍होंने इस अवधि में पुष्‍कर के गऊघाट(श्री बद्री बाकोलिया निर्मित) पर रैगर जाति का विमान जल जझूलनी ग्‍यारस को भी निकाला जिससे कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति आने पर भी रैगर जाति को सम्‍मानजनक स्‍थान दिलाया । आपके अथक प्रयासों से अजमेर शहर में 20 बीघा जमीर रैगर समाज को शमशान की भूमि के रूप में उपलब्‍ध करवाई । आप समाज सुधार के दौरान तीन बार जेल भी गए ।

       श्री आर्य ईमानदार, कठिन परिश्रमी, अच्‍छे वक्‍ता होने के साथ-साथ राजस्‍व कानून के अच्‍छे ज्ञाता भी थे । वर्तमान में आपके परिवार में पत्नि तथा दो पुत्रियां है । बड़ी बेटी ऊषा आर्य तो ब्‍यावर निवासी श्री ओमप्रकाश जी फलवाडिया के साथ ब्‍याही गई जो बड़ौदा बैंक में है तथा छोटी लड़की लीला आर्य देवली निवासी श्री राम निवास जी मोरलिया के साथ ब्‍याही गई जो राजस्‍थान केडर में IAS अधिकारी है ।

       श्री सुखराज सिंह आर्य नोगिया जी का स्‍वास्‍थ काफी गिरने के कारण आपको बीमारीयों ने घेर लिया था । फलस्‍वरूप 13 जनवरी 1983 को जाति माता का यह दैदीप्‍यमान सूर्य अस्‍त हो गया और वे हमारा साथ छोड़कर स्‍वर्ग सिधार गये । नोगिया जी के निर्वाण दिवस पर प्रत्‍येक वर्ष अजमेर व जयपुर में आपके स्‍मरण में पुण्‍य तिथि का आयोजन किया जाता है ।

 

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