स्‍वामी आत्‍माराम ‘लक्ष्‍य’

 

         राजस्‍थानियों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी
खूब किया रैगर जाति का उद्धार, वह तो आत्‍माराम लक्ष्‍य ने ठानी थी
ग्राम-ग्राम ले जन जागृति सशाल, जीने का अर्थ समझाया था
देह, देवालय अलख का शुभ भक्ति मार्ग समझाया था
बहुजन, दलित शोषितों को उसने गले लगया था
राजस्‍थानियों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी
खूब किया रैगर जाति का उद्धार, वह तो आत्‍माराम लक्ष्‍य ने ठानी थी
विद्या का मार्ग दिखाया, सारे हिन्‍दुस्‍तान में
नई क्रान्ति का दीप जलाया, दलितां के जहान में
मृत्‍यु भोज, दहेज, बाल-विवाह, सांस-मदिरा का विरोध किया था
शिक्षा, एकता, विधवा-विवाह, समता पर बल दिया था
कर सामाजिक परिर्वतन, एक आदर्श जीवन दिया था
राजस्‍थानियों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी
खूब किया रैगर जाति का उद्धार, वह तो आत्‍माराम लक्ष्‍य ने ठानी थी
मातृ शक्ति का मान बढ़ाने की ठानी थी
अनाथों के नाथ, सम्‍मान दिलाने की ठानी थी
समता मूलक समाज हित, सजा काठ की पाई थी
रोगी ज़र-ज़र तन हुआ, उम्र की यही अमिट कहानी थी
मानवता की लड़ाई लड़ते, जो दी जीवन की कुर्बानी थी
मानव नहीं वह अवतारी वह, अनाथों के नाथ बन आया था
केवल उनतालिस अल्‍पायु में, बहुमुखी ज्ञान कराया था
दिखा गया पथ सीखा गया, जो सीख सिखानी थी
कोटि-कोटि नमन भगवान दास का, जो दलित पीड़ा पाये थी
राजस्‍थानियों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी
खूब किया रैगर जाति का उद्धार, वह तो आत्‍माराम लक्ष्‍य ने ठानी थी

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