युवा पीढी और डॉ. अम्बेडकर

आज, यदि हम अपनी युवा पीढी की बात करे, तो उसके विचार, उसकी सोच उसका भविष्य बिल्कुल अलग नजर आता है, उसमे कुछ कर गुजरने का जजबा तो है लेकिन उसे आज भी यह अहसास नही है, कि वो जिस किस्ती मे सवारी कर रहे है, जो कितनी मुश्किलो व तकलीफो और तुफानो का सामना करने के बाद, यहा तक पहुची है, आवश्यकता इस बात कि है कि, बीते समय की याद को ताजा करने की जरूरत है अन्यथा ऐसा नही हो कि युवा पीढी अपना इतिहास भूल जाये और जो अपना इतिहास भूल जाता है, उसकी सफलता भी संदिग्ध रह जाती है, इसलिए आज आवश्यकता है, हमारी युवा पीढ़ी को हमारे इतिहास, महापुरूष और आधुनिक भारत के पितामाह डॉ. अम्बेडकर से अवगत कराया जाये ।

आज कि युवा पीढ़ी से यदि पुछा जाये कि क्या आप जानते है कि डॉ. अम्बेडकर कौन थे, तो उनका एकमात्र उत्‍तर रहता है कि उन्होने हमारे देश का संविधान बनाया और हमे आरक्षण दिया ।

प्रश्न यह उठता है कि हमारी इस युवा पीढ़ी मे जिसमे कई डॉक्टर, इन्जिनियर, वकील, आर.ए.एस., आई.ए.एस., शामिल है, क्या उनका यह ज्ञान पर्याप्त है, उन्हे आज भी यह पता नही है की वे जिसे अपनी मेहनत का परिणाम मानते है जबकि सच्चाई यह है कि डॉ.अम्बेडकर द्वारा अपना सम्पूर्ण जीवन न्योछावर करने के बाद यह सम्भव हो पाया, यह उनकी कड़ी मेहनत और संघर्ष का नतीजा है की हम स्कूल, कॉलेज मे भर्ती हो पाये और मेहनत करके आरक्षण के सहारे कुछ बन पाये है । जबकि आजादी से पूर्व दलित व आदिवासियो का स्कूल, कॉलेज मे प्रवेश केवल कागजी था । या यू कहे कि प्रवेश निषेध था । इसलिए कहा जाता है कि आज हम और आप डॉ. अम्बेडकर की वजह से उच्चे-उच्चे पदो पर आसीन है और शान से अपना जीवन जी रहे है । इसलिए हमारी युवा पीढ़ी को इतिहास कि झलक दिखाना आवश्यक है अन्यथा ऐसा ना हो कि, हमारी भावी युवा पीढ़ी अहसान फरामोश हो जाये, जिसकी सारी जिम्मेवारी सिर्फ हमारी ही होगी । क्योकि यह हमारा कृतव्य है की हम, हमारी आने वाली युवा पीढ़ी को डॉ. अम्बेडकर के जीवन दर्शन तथा उनके द्वारा इस देश की 3000 वर्ष पुरानी व्यवस्था को उखाड़ फेकने का जो कार्य किया, जिसके कारण हम आज सम्मान से जी रहे है ।
हमे हमारी युवा पीढ़ी को बताना होगा की जो व्यवस्था पिछले 3000 साल से चल रही थी, इस देश मे कितने ही संत, ज्ञानी, समाज सुधारक और महात्मा हवा के झोकें कि तरह आये और चले गये, लेकिन कोई इस व्यवस्था को बदल नही पाया । जो उच्च-नीच हजारो साल से चल रहा थी उसमे बदलाव यदि सम्भव हुआ तो वह डॉ. अम्बेडकर की देन है, उन्होने अपने 30 वर्ष के राजनैतिक सफर मे 3000 साल पुरानी व्यवस्था को बदलकर रख दिया, तथा भारत के संविधान मे ऐसे प्रावधान कर दिये कि भविष्य मे ऐसी भेदभाव पूर्ण व्यवस्था उत्पन न हो ।
जिस समाज के पास ऐसी स्वर्णात्‍तम ऐतिहासिक धरोवर हो, इससे बड़े गर्व की बात क्या हो सकती है । जो पिछले 10,000 वर्षो के सर्वे के आधार पर आज भी इस दुनिया मे भगवान बुद्ध के बाद जिनका नाम लिया जाता है । वंचित समाज के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले डॉ. अम्बेडकर को हमारी युवा पीढ़ी जाने पढ़े, ताकि हमारी युवा पीढ़ी उनकी ही तरह समाज के प्रति जवाबदेह बन सके और समाज के विकास मे भागीदार बने । यदि हमारी युवा पीढ़ी डॉ. अम्बेडकर के जीवन दर्शन कि जानकारी से वंचित रहती है तो यह उसके तथा हमारे दोनो के भविष्य के लिए शुभ संकेत नही है ।
डॉ. अम्बेडकर के लिए तो कई बार अंग्रेजो ने कहा यदि 500 बुद्धिमान ग्रेजुएट भी डॉ. अम्बेडकर के सामने आकर खड़े हो जाये तो भी ज्ञान के मामले मे वे डॉ. अम्बेडकर से जीत नही सकते है ।
किसी ने कहा है कि वो तो चलता फिरता विश्वविधालय थे ।
उनके द्वारा किसी भी बिन्दु या मद विचार आज आज 100 वर्षो बाद भी उतने ही प्रांसगिक है जितने प्रांसगिक 100 वर्ष पूर्व थे ।
* उनके द्वारा किये गये प्रश्न का कभी किसी के पास उत्‍तर नही होता था ।
* वे कभी भी उनकी तारीफ प्रंससा करने वाले के दवाब मे नही आते थे ।
* उनके द्वारा किसी भी बिन्दु या शब्दो की स्पष्ट सटीक व्याख्या का कोई सानी नही था ना है ।
* उनकी भाषा मे हमेशा दृढ़ता नजर आती है । वो अपनी बात पर हमेशा फोलाद/चट्टान की तरह खडे़ नजर आते थे ।
* उनके बारे मे यह स्पष्ट तोर पर कहा जा सकता है, वे भगवान तो नही, लेकिन किसी भगवान से कम भी नही ।
* भगवान/ईश्वर एक सपना है, लेकिन डॉ. अम्बेडकर एक सच्चाई है ।
* वे सभी धर्मों के प्रखण्ड विद्धान थे ।

जिस देश मे एक छोटे से कानून को बनाने के लिए संसद मे बहुमत, राजनैतिक पार्टियों कि सहमति, कानूनी विशेषज्ञो की राय, संसद मे सांसदो के आरोप प्रत्यारोप, संसदीय समितियो मे सहमति, राजनैतिक मजबूरियाँ होते हुए, बनाना मुश्किल हो । उस देश को उन तमाम आलोचनाओ के बावजूद जिसमे उस व्यक्ति को देशद्रोही तक कि संज्ञा दी गई हो, और एक गैर कांग्रेसी होते हुए, एक अछूत द्वारा देश के सबसे पवित्र ग्रन्थ (संविधान) को लिख देना और उसके बाद इस देश मे सर्व सम्मति से लागू हो जाना, आप समझ सकते है कि वो कितने महान विद्धान द्वारा लिखा गया होगा जिस पर यह देश आज भी मजबूती के साथ खड़ा है और विकास की राह मे अग्रसर है ।

 

 

लेखक

कुशाल चन्द्र रैगर, एडवोकेट

अध्यक्ष, रैगर जटिया समाज सेवा संस्था, पाली (राज.)

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