डॉ. अम्बेडकर के प्रति, हम गैर जिम्मेदार क्‍यों?

अक्सर बात हम डॉ. अम्बेडकर द्वारा, वंचित समाज के लिए किये गये कार्यों त्याग और बलिदान की, बात तो करते हैं, लेकिन अक्सर हम उनके प्रति जवाबदेहीता भूल जाते हैं, यह ठीक वैसा ही है, जैसा कि पुत्र-पुत्री द्वारा अपने माता-पिता के प्रति अपनी जवाबदेहीता भूल जाना है । हम यह नही कहते हैं इस समाज मे सभी ऐसे ही है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि अधिकतर ऐसे ही है, जिन्हे हम गैर जिम्मेदार और अहसान फरामोश कह सकते हैं ।

जिस प्रकार आज की आधुनिक पीढ़ी अपने माता-पिता के प्रति गैर जिम्मेदार हो गई है, ठीक उसी प्रकार वह इस मसीहा डॉ. अम्बेडकर के प्रति भी एहसान फरामोश हो गई है । यह ठीक वैसा ही है, जैसे की आमतोर पर इस कलयुगी दुनिया मे हो रहा है ।

प्रश्न यह उठता है कि हमारी जवाबदेही डॉ. अम्बेडकर के प्रति क्यो उत्पन्न होती है, इसका सीधा सा उत्तर है कि, आज हमे जो प्राप्त है, जिसमे सर्वप्रथम शिक्षा, नौकरी, गाड़ी, बंगला, मान-सम्मान यह सब डॉ. अम्बेडकर की ही देन है, जिसे हम अपनी मेहनत से प्राप्त हुआ मानते है, जबकि सच्चाई यह है कि, यदि यह हमारी मेहनत का ही है, तो यह 26 जनवरी 1950 से पहले हमे क्यो नही प्राप्त हुआ, क्या हमने पहले मेहनत नही की थी ? जिस तथाकथित आजाद भारत मे हम चेन की नींद से रहे हैं, आजादी के साथ रहे हैं, यह डॉ. अम्बेडकर द्वारा वंचित समाज भारत के संविधान मे दिये गये मूल अधिकारों व आरक्षण की देन हैं ।

बात यदि जवाबदेहीता की है, तो यह सबसे पहले किसकी उत्पन्न होती है । मेरा मानना है की घर मे सबसे अधिक जवाबदेहीता, घर के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति की होती है, क्योकि वह घर के सबसे अधिक साधनों का उपयोग करता है, ठीक उसी प्रकार डॉ. अम्बेडकर के प्रति जवाबदेहीता की बात करे, तो डॉ. अम्बेडकर का सबसे ज्यादा उपयोग दलित आदिवासी-पिछड़े समाज के बुद्धिमान लोगों ने किया है, ऐसी स्थिति मे सबसे ज्यादा जवाबदेहीता भी उनकी ही बनती है और बुद्धिमान लोगों कि जवाबदेहीता की चर्चा करे तो लगता है, कि आज भी डॉ. अम्बेडकर के द्वारा कही हुई बात साक्षात् सच है कि ‘‘मुझे मेरे पढ़े लिखे लोगों ने धोखा दिया है ।’’ और देखा जाये तो आज भी धोखा ही दे रहे हैं । हम यह नहीं कह रहे हैं कि सभी धोखा दे रहे हैं, लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक धोखा ही दे रहे हैं ।

वास्तविकता देखा जाए तो घर मे हम भगवान की पूजा, अगरबत्ती, दीया करना कभी नही भूलते हैं, जबकि यदि पूछा जाये की इस भगवान ने आपको क्या दिया है, तो कहते है कि, सब भगवान का ही दिया हुआ है, तो प्रश्न यह उठता है की, यह भगवान 26 जनवरी 1950 से पूर्व कहा चले गये थे, क्या हमने उस समय इनकी पूजा नही की थी, जबकि सच्चाई यह है कि आज हो या कल, यदि भगवान को सबसे ज्यादा, कोई याद करता है, तो वह गरीब आदमी याद करता है, जबकि यदि इस दुनिया मे सबसे ज्यादा किसी का शोषण होता है, वह इसी गरीब आदमी का ही होता है । इसलिए यह मिथ्या धारणा है कि सब भगवान की देन हैं । आज इस देश मे हमे जो कुछ भी मिला है, वह सब कुछ 26 जनवरी 1950 को लागू संविधान मे प्राप्त मूल अधिकार व आरक्षण की देन हैं जिसकी वजह से हम अपने आपको डॉक्टर, इन्जिनियर, वकील, आई.ए.एस., आर.ए.एस. मजिस्ट्रेट, जज, राजपत्रित अधिकारी कहते हैं ।

जबकि 26 जनवरी 1950 से पूर्व, तो हम मे से कोई डॉक्टर, इन्जिनियर, वकील, आई.ए.एस., आर.ए.एस. मजिस्ट्रेट, जज, राजपत्रित अधिकारी नहीं था, जबकि तथाकथित भगवान उस समय भी यही थे । यह वैसा ही झूठ है, जिसे 1000 बार बोले तो, लोग उसे सच समझने लगते हैं, जबकि झूठ-झूठ ही रहता है ।

14 अप्रैल व 6 दिसम्बर का दिन आता है जिसे हम अम्बेडकर जंयति व निर्वाण दिवस के रूप मे मनाते हैं, कितना मनाते हैं, यह आप और हम बहुत अच्छी तरह जानते हैं, जबकि थोड़ा बहुत भी आज जो नजर आ रहा है, वह डॉ. अम्बेडकर द्वारा देश के प्रति दिये गये बलिदान, त्याग के कारण, मजबूरीवश, अपनी इज्जत बचाये रखने के लिये मना रहे हैं । आज देखा जाये तो इन पढ़े लिखे तथाकथित बुद्धिमान, नौकरी करने वालो ने डॉ. अम्बेडकर को क्या दिया है ? केवल धोखा, यह कह सकते है कि यदि आज सबसे ज्यादा दुरूपयोग डॉ. अम्बेडकर का, यदि किसी ने किया है, तो वह इन तथाकथित पढ़े लिखे बुद्धिमान लोगों ने किया है, जो सरकार से मोटी-मोटी तनख्वाह ले रहे हैं, जबकि इनकी जवाबदेहीता की बात करे तो, इनको इतनी सी फुर्सत नही कि, वे 14 अप्रेल व 6 दिसम्बर को अम्बेडकर मूर्ति पर आये और बाबा साहेब को याद करे । आज स्थिति यह है कि चारो तरफ बाबा साहेब का फायदा उठाने वाले हैं, लेकिन जब बाबा साहेब को कुछ देने की बात आती है, इनकी जवाबदेहीता शून्य नजर आती है । यह सब लोग बाबा साहेब के एहसानमंद लोग है या एहसान फरामोश, आप और हम अच्छी तरह जानते हैं । वास्तविकता यह है कि बाबा साहेब का फायदा उठाने वाले, बाबा साहेब को पूरी तरह नही जानते, उन्हें पढ़ते नही है । आज आवश्यकता है उनके विचारो को आम लोगों तक पहुचाने की ।

यदि हम अपनी जवाबदेही, ईमानदारी से निभाना चाहते हैं, तो हमे बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुचाने का कार्य करना हेागा, और जिस भगवान को हम रोज याद करते हैं, उसने हमे क्या दिया ?, यह किसी को पता नही, लेकिन यह तो सर्वत्र सत्य है, कि हमे जो मिला है, जिसमे शिक्षा से लेकर पद, मान-सम्मान, धन, दौलत, सभी डॉ. अम्बेडकर की देन हैं । आप यदि चाहते हैं कि, यह हमारे पास हमेशा रहे, तो यह जरूरी है कि, हमारी पीढ़ी को हम डॉ. अम्बेडकर के विचारों से अवगत कराये, हमे यह समझना होगा कि डॉ. अम्बेडकर ही हमारे असली भगवान है ।

 

लेखक

कुशाल चन्द्र रैगर, एडवोकेट

अध्यक्ष, रैगर जटिया समाज सेवा संस्था, पाली (राज.)

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