स्‍वामी श्री भगतराम जी महाराज

Bhagatram

भगतरामजी महाराज, बसवा निवासी, जयपुर राजस्‍थान रघुकुल रैगर समाज पिता श्रीमान् परमपूज्‍य गिरधारीराम जी जलुथरिया वंश में शुभ मि‍ती पौष शुक्‍ला पंचमी सम्‍वत् 1973 कृष्‍ण पक्ष पंचमी 1973 साल ब्रहम मुहर्त में जन्‍म हुआ । आपकी माता का नाम जमना देवी सांटोलिया वंश में ग्राम टेहला अलवर राज्‍य की है, भगतराम के तीन सुपुत्र हैं । बडा भगवान सहाय इन से छोटे नेमीचन्‍द इनसे छोटे चुन्‍नीलाल जी, इनसे छोटे सुवालाल जी इनसे छोटे आप भगतराम जी है । इनके बाल काल से ही श्री स्‍वामी जी का ही सत्‍य उपदेश है, बसवा अच्‍छा कस्‍बा शहर है, जिनके प्रचीनकाल का ही किल्‍ला कोट खाई दरवाजा गेट बुर्जे शहर में हर प्रकार का व्‍यापार होता है, बसवा शहर में 51 देव मंदिर है, जिनमें मुख्‍य मंदिर श्री कल्‍याण जी महाराज का है, तथा कई धर्म स्‍थान धर्मशाला है तथा साधुओं का स्‍थल है, बाग बगीचे बहुत अच्‍छे है, जिनमें जनसंख्‍या, वंश बांधवां सहित सर्व समाज सवा पन्‍द्रह हजार है, आज यह सर्वजन, भगतराम के अनुयाई है, इनको रामजन मण्‍डल देहली द्वारा महामन्‍त्री का पद मिला हुआ है, सुधार समिति, राज‍नीति में भी इनका भाग है, इनके घर का कुआ, बाग शिव मंदिर है, पास में ही रामपुरा तीर्थ है, जहां भाद्रपद जन्‍माष्‍टमी का मेला लगता है, अपने बांधवां सहित सबका श्री द्वारकानाथ का मंदिर है, जिनमें हरी कीर्तन साधु संत हमेशा होता है, इन चारों भाईयों का स्‍वभाव बहुत अच्‍छा है ।
इनका पहला काम तो सुधार समिति का है, हरेक जगह इन्‍होंने श्रीनगर भावपुरा गुरू स्‍थान पर बैशाख शुक्‍ला 3 सम्‍वत् 2021 तारीखा 13.05.1964 में श्रीराम यज्ञ में श्री श्री 108 स्‍वामी जी जीवाराम जी धर्माचार्य के समक्ष तन, मन, धन से भाग लिया, इन्‍होंने ही इसी श्री माक्षानन्‍द गीता जी शास्‍त्र को धर्म पर कमर बांध के संसार उद्धार के निमित छपाई है, इनके ग्राम बस्‍ती वंश में ईश्‍वर भक्ति, गुरू भक्ति, साधु सेवा, श्रद्धा शक्ति में सदा होती है, यह बसवा शहर बड़ा धार्मिक तथा रमणी शौभायमान है, इनको श्री स्‍वामी जीवारामजी महाराज का आशीर्वाद तथा धन्‍यवाद इनके माता पिता को धन्‍यवाद देते हैं ।
                      दोहा
जननी जने तो भगत जन, के दाता के सूर ।
नितर रीजे बांजडी, मति बिगाडे नूर ।।
सतवंति सूरा जने, बड भागिन दातार ।
साधु तो लक्ष्‍मी जने, फूहड़ जने संसार ।।
आशिश हमारी सफल हो रचे धर्म का खेल ।
सकल कामना सिद्ध हो रखों प्रभो से मेल ।।
मूर्ति से कीर्ति बडी, बिना पंख उड जाय ।
मूर्ति तो मिट जायेगी कीर्ति अमर हो जाय ।।

 

ashram

भगतराम का जीवन चरित्र इति समाप्‍त करते जयनाराण संशोधक

हरि ओम तत्‍सत शान्ति ! शन्ति !! शान्ति !!! इति । order Sildalis online cheap, cheap clomid.

 

(साभार :- श्री मोक्षानन्‍द गीता, मुकेश गाडेगावलिया )