श्री भौलारामजी तौणगरिया

जीवन में श्रद्धा व समर्पण के भाव जब जागृत होते है, तो वह प्रबल पुण्योदय का ही संकेत होता हैं । पुण्य जब उदय में आता है, तो इंसान की हर राह मखमली सेज की तरह कोमल बन जाती है । अपने समर्पित पुरुषार्थ से अपार पुण्यार्जन कर जीवन की ऊंचाईयों को छूने वाले पाकिस्तान स्थित सिन्ध हैदराबाद में सरलमान, धर्मनिष्ठ श्री स्व. हीरालालजी तौणगरिया के घर जन्में उदारमान समाज सुधारक स्व. श्री भौलारामजी तौणगरिया समाज सुधार के साथ सन् 1930 में सिन्ध हैदराबाद में म्यूनिसिपल कमिशनर बनकर रैगर समाज का गौरव बढ़ाया ।

स्व. श्री भौलारामजी की प्रारंभिक शिक्षा मैट्रीक तक रही । आपके पिताजी मूल निवासी राजस्थान के लाडनू के रहने वाले थे । आप अखिल भारतीय रैगर महासभा के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के साथ रैगर समाज के इतिहास में स्वतन्त्रता से पूर्व सन् 1930 में सिन्ध हैदराबाद में म्यूनिसिपल कमिशनर बनने का गौरव हासिल हुआ और इसी लिए आज रैगर जाति में राजनैतिक पदार्पण के सूत्रधार कहलाते है ।

अखिल भारतीय रैगर महासभा के अध्‍यक्ष के पद पर आपका कार्यकाल सन् 1944 से 1946 का रहा और साथ आपको रैगर समाज की सर्वोच्‍य संस्‍था के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनने का गौरव प्राइज़ किया । आपके कार्यकाल में सिन्ध हैदराबाद में रैगर समाज के बीच सामाजिक शैक्षिक व धार्मिक कार्यो के उत्थान में धर्मगुरु स्वामी ज्ञानस्वरुपजी महाराज के सानिध्य में सकारात्मक व रचनात्मक रुचि रख कर सामाजिक दायित्व निभाया । सिन्ध हैदराबाद में आप के अखिल भारतीय रैगर महासभा के सूत्रधार स्वामी आत्मराम लक्ष्य के सर्म्पक में आये जिससे समाज सुधार के लिए रुपरेखा तैयार कर समाज में जन चेतना के साथ समाज उत्थान के कार्यो किये ।




स्व. श्री भौलारामजी तौणगरिया के नेतृत्व में दिनांक 2-3-4 नवम्बर 1944 को निश्चित प्रथम अखिल भारतीय रैगर महासम्मेलन के अन्तर्गत होने वाले उपसम्मेलनों में रैगर समाज सम्मेलन हेतु आपको सभापति चुना गया । अपने सभापतिय भाषण में रैगर समाज में शिक्षा के महत्व पर अधिक बल दिया गया । आज रैगर समाज में शिक्षा के अपरिहार्य रुप में अनेकानेक आई.ए.एस., आई.पी.एस., आई.आर.एस., डॉक्टर, ईजीनियर, जज, वकील आदि हमारे समाज की धरोहर है । प्रथम अखिल भारतीय रैगर महासभा में संगठन का महत्व समझते हुये श्री स्वामी आत्मारामजी लक्ष्य ने अखिल भारतीय रैगर महासभा की स्थापना की और स्व. श्री भौलारामजी तौणगरिया को महासभा का प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित होने का गौरव प्राप्त हुआ । आपके अध्ययन काल में रैगर समाज को विषम परिस्थितियों के बावजूद ऐतिहासिक सफलताऐ मिलती रही ।

 

 

(साभार- श्री गोविन्‍द जाटोलिया : सम्‍पादक – मासिक पत्रिका ‘रैगर ज्‍योति’)