श्री भूरालाल भगत जी

आप श्री रामनगर कॉलानी सांगानेर जिला जयपुर के निवासी हैं । गोत्र से आलोरिया हैं । सन् 1939 में अंग्रेजों के खिलाफ प्रजा मण्‍डल का आन्‍दोलन चला कि भारतीयों को शासन में भागीदार बनाया जाय । रैया (जनता) की तरफ से दौलतराज भण्‍डारी तथा दामोदर व्‍यास पैरोकार थे । उस वक्‍त भगतजी को लोक सेवक चुना गया । लोक सेवक का पद बहुत महत्‍वपूर्ण था । कौन देशभक्‍त है त‍था कौन गद्दार है इसकी लिखित सूचना रैया की तरफ से अंग्रेजों को भेजते थे । इससे अंग्रेजों को रैया (जनता) की राय का पता चलता था । अंग्रेजों को इस प्रकार की सूचना से ही इस नतीजे पर पहुँचना पड़ा कि भारत की जनता अंग्रेजों के सख्‍त खिलाफ है इौर आजादी से पहले जयपुर में अंग्रेजों के खिलाफ जुलूस निकालते हुए भगतजी को पुलिस ने गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया । भगतजी ने जयपुर सेन्‍ट्रल जेल में 9 दिन की सजा काटी । भगतजी के साथ अन्‍य अनुसूचित जाति के नेता हरलालसिंह बलाई तथा जीवणसिंह धाणका भी जेल गए थे ।

आजादी के बाद भगतजी हमेश कांग्रेस में ही रहे । जयपुर जिला कांग्रेस कमेटी के सदस्‍य रहे । 1950 में लगातार तीन बार ग्राम पंचायत सांगानेर के सदस्‍य रहे । बाद में नगरपालिका बन जाने पर 1981 में भंग होने तक पार्षद रहे तथा प्रशासन कमेटी के अध्‍यक्ष रहे । सम्‍वत् 1996 में सांगानेर में प्रचार रैगर महासभा की स्‍थापना की जिसके वे अध्‍यक्ष थे । इस महासभा का उद्देश्‍य समाज सुधार करना भगतजी व्‍यवस्‍था कमेटी के सदस्‍य थे । भगतजी ने लखेसरा, बाढदेवरी, कुन्‍दनपुरा, श्रीरामनगर कॉलोनी आदि रैगर और अनुसूचित जातियों की बस्तियाँ बसाई । भगतजी में सदैव देश, समाज और जाति की सेवा की प्रबल भावना रही है ।

 




 

 

(साभार- चन्‍दनमल नवल कृत ‘रैगर जाति : इतिहास एवं संस्‍कृति’)