छत्रपति साहूजी महाराज

मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के छत्रपति साहूजी महाराज का जन्म 26 जुलाई 1874 में कोल्हापुर के राजमहल में हुआ था । छत्रपति शाहू कोल्हापुर के राजा थे । वह संभाजी के बेटे और के बेटे शिवाजी महान के पौत्र थे । राजा छत्रपति शाहू जी को एक सच्चे प्रजातंत्रवादी और समाज सुधारक के रूप में माना जाता था । वह कोल्हापुर के इतिहास में एक अमूल्य मणि थे ।

छत्रपति शाहू समाज में महिलाओं के लिए शिक्षा सहित कई प्रगतिशील गतिविधियों के साथ जुड़े रहे थे । साहूजी जीवन के शुरुआती दौर में गरीबों के दुख-दर्द को महसूस करने लगे । राज तिलक होते ही उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों, दबे कुचले लोगों को प्रशासन में भागीदारी दी । इतना ही नहीं शासन-प्रशासन, धन, धरती, व्यापार, शिक्षा, संस्कृति व सम्मान प्रतिष्ठा सभी क्षेत्रों में वे अनुपातिक भागीदारी के प्रबल समर्थक थे । उनका नारा था कि ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ ‘जिनकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी’ व ‘जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी जिम्मेदारी है ।’ सभा की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष गुरुपूरन पटेल ने कहा कि राजर्षि छत्रपति साहूजी महाराज एक ऐसे महान समाज सुधारक थे । जिन्होंने अपने राज्य में 50 प्रतिशत का आरक्षण हर क्षेत्रों में देकर समतामूलक समाज के स्थापना की शुरुआत किया, जिन्हें आरक्षण का जनक भी कहा जाता है । साहूजी समाज सुधारक ज्योतिबा फुले के योगदान से काफी प्रभावित थे । उनका जाति और धर्म की परवाह किए बिना दलितों के लिए प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण कदम था । छत्रपति शाहू ने गरीबों के सामाजिक उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया । उन्होंने हमेशा निचली जातियों के विकास और कल्याण पर बल दिया । उन्होंने सभी के लिए शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए । शाहूजी महाराज ने दलित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की, हॉस्टल स्थापित किये और बाहरी छात्रों के लिए शरण प्रदान करने के लिए आदेश दिए । छत्रपति शाहू के शासन के दौरान, बाल विवाह पर ईमानदारी से प्रतिबंधित किया गया था । उन्होंने अंतरजातिय विवाह और विधवा पुनर्विवाह के पक्ष में समर्थन की आवाज उठाई । उसकी गतिविधियों के लिए, छत्रपति शाहू समाज को कई कोनों से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा । शाहूजी महाराज ज्योतिबा फुले द्वारा प्रभावित थे और वह लंबे समय सत्य शोधक समाज, फुले द्वारा गठित संस्था के संरक्षण भी रहे । लेकिन, बाद में वह आर्य समाज की ओर चले गए । कुश्ती छत्रपति शाहू के पसंदीदा खेल में से एक था । देश भर से पहलवानों को कोल्हापुर के अपने राज्य के लिए आने के लिए कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता था । महान शासक और सामाजिक विचारक, छत्रपति शाहूजी महाराज का 6 मई, 1922 को निधन हो गया ।