श्री गंगामाई मंदिर - पुष्‍कर

यह श्री सालिगराम भगवान् श्री गंगामाई मंदिर के नाम से विख्‍यात है । ओर यही मंदिर के अन्‍दर समाज की धर्मशाल भी बनी हुई है । पुष्‍कर हिन्‍दू धर्म का पावन धाम है । ऐसे प्रसिद्ध धाम है । ऐसे प्रसिद्ध धाम में रैगरों का गंगामाई का मंदिर एक तीर्थ है । वर्ष में एक बार पुष्‍कर में भारी मेला लगता है जिसमें देश विदेश से लाखों यात्री आते है । मेले के अवसर पर तथा अन्‍य अवसरों पर रैगर जाति के लोग यहां इकट्ठे होकर एक दूसरे से मिलते हैं और अपने विचारों का आदन-प्रदान करते हैं । रैगर जाति के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, नैतिक तथा आध्‍यात्‍मिक उत्‍थान के सम्‍बंध में सात पट्टियों के लोग इकट्ठे होकर गंभीरता से विचार करते हैं । प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के मेले पर पुष्‍कर आने वाले रैगर बंधुओं के ठहरने की व्‍यवस्‍था, पीने के पानी की व्‍यवस्‍था, रोशनी, सफाई तथा पंचायत सम्‍मेलन आदि आयोजन मंदिर कमेटी की देख-रेख में किये जाते हैं । भाद्रवा सुदी 11 को रेवाड़ी जुलूस निकाला जाता है । जन्‍माष्‍टमी पर विशेष सांस्‍‍कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं । इस मंदिर की एक कमेटी बनी हुई है । वही इसका संचालन करती है । इस कमेटी में शहर व गांवों से चुने हुए प्रतिनिधि अथवा पंच आते है । समाज की उन्‍नती, निर्माण, विकास, समाज सुधार आदि विषयों पर विचार विमर्श करते हैं । यह कमेटी प्रतिवर्ष मंदिर के कीमती सामान को चैक करती है । यह एक बहुत बड़ा मन्दिर है । इसका निर्माण आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व हुआ । इसमें मर्तियों की प्रतिष्‍ठा सम्‍वत् 2008 में हुई । इस मन्दिर का खर्च चलाने के लिए आमदनी के जरिये निश्चित किए गए हैं । इसकी आमदनी आर्थिक सहयोग, चन्‍दा, धर्मदण्‍ड, एक रूपया प्रति घर से उगाई, दण्‍ड की चौथाई, विवाह आदि खुशी के उत्‍सवों से होती है । मंदिर का काफी विस्‍तार हुआ है । यह मंदिर कितना बड़ा है इस बात से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्ष 1981-82 का वार्षिक प्रतिवेदन एवम् आय-व्‍यय विवरण देखने से कुल आय रूपयु 29914.55 तथा कुल खर्च रूपये 15197.64 हुये । पुष्‍कर में रैगर जाति का ऐसा भव्‍य मंदिर एवम् धर्मशाला का होना रैगर जाति के लिए गौरव की बात है ।

 



 

 

(साभार- चन्‍दनमल नवल कृत ‘रैगर जाति : इतिहास एवं संस्‍कृति’)