श्री गंगा राम जी पीपाड़ के रहने वाले थे । बाद में उदयपुर में जाकर बस गये । उन्‍होंने शेर को मारा था । उदयपुर के राणा जी ने उनकी बहादूरी से प्रसन्‍न होकर अपने बराबर कुर्सी देकर उन्‍हें सम्‍मान प्रदान किया था ।

 

(साभार- चन्‍दनमल नवल कृत ‘रैगर जाति : इतिहास एवं संस्‍कृति’)