दिल्ली प्रांतीय रैगर पंचायत

भारत में सदियों से पंचायत ही समाज संगठन का माध्‍यम रही है, उसी के अनुसार हमारे समाज में भी प्राचीनकाल से पंचायत सामाजिक संगठन का माध्‍यम रही है । समाज में लोगों को कानून का ज्ञान नहीं था । धन की कमी से मुकदमेबाजी से डरते थे इसलिए अपना न्‍याय अपनी पंचायतों में ही करते थे ।

हमारे समाज के घटक राजस्‍थान के गावों से आजिविका की तलाश में ही सैकड़ों मील चल कर दिल्‍ली आदि बड़े शहरों में आकर बस गए । जहाँ रहे वहां समूहों में ही रहे । इसी कारण हमारे बीच राजस्‍थानी वेश-भूषा, भाषा एवं कलचर वही बना रहा और पंचायत भी साथ सामाजिक व्‍यवस्‍‍था एवं संगठन का माध्‍यम रही ।

पहली बार देशभर के रैगर समाज को एक सूत्र में लाने के लिए समाज की सभी पंचायतों को जोड़ कर 1944 को दौसा (राजस्‍थान) में अखिल भारतीय महासम्‍मेलन के उदेश्‍य से अखिल भारतीय रैगर महासभा का श्री महाराज स्‍वामी ज्ञानस्‍वरूप जी की अध्‍यक्षता में गठन हुआ । दिल्‍ली की पंचायत का नाम भी ”दिल्‍ली प्रान्‍तीय रैगर पंचायत” उसी समय रखा गया ।

दिल्‍ली राज्‍य संघ में रैगर समाज का संगठन दिल्‍ली प्रान्‍तीय रैगर पंचायत (रजि.) के नाम से प्रतिस्‍थापित है । इस संस्‍थान की आय के स्‍त्रोत विवाह संस्‍कार तथा दान आदि है । यह संगठन विगत एक शताब्‍दी से भी अधिक समय से समाज उत्‍थान के कार्य कर रहा है । इस संगठन ने दिल्‍ली के बाहर भी रैगर समाज पर जहाँ अत्‍याचार हुए, वहाँ पर दिल्‍ली से प्रतिनिधि मण्‍डल भेजे हैं तथा आर्थिक सहायता भी प्रदान की है । यह पंचायत स्‍था‍नीय मत भेदों का निपटारा करती है । उच्‍च शिक्षा को प्रोत्‍साहिन देने के लिए पंचायत कोष से निर्धन एवम् योग्‍य छात्रों को आर्थिक सहायता दी जाती है । धार्मिक एवम् सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों में यह पंचायत सक्रिय भूमिका निभाती है । सामुदायिक चेतना एवम् राष्‍ट्रीय कार्यक्रमों में यह पंचायत भारत के अन्‍य प्रान्‍तों में रहने वाले रैगर बन्‍धुओं का मार्गदर्शन करती है तथा सहयोग प्रदान करती है । इस संगठन को मजबूत बनाने एवम् निष्‍पक्ष न्‍याय दिलाने में श्री चन्‍द्रभान तोंणगरिया, श्री कल्‍याणदास पीपलीवाल, श्री खुशहालचन्‍द मोहनपुरिया, श्री किशनलाल कुरड़िया, श्री मोतीलाल बाकोलिया, श्री रामचन्‍द्र खोरवाल, श्री कंवर सैन मौर्य तथा श्री मालाराम नोगिया आदि का विशष योगदान रहा है ।

पंजीकृत कर्यालय : श्री गंगा मन्दिर, 53 रैगर पुरा, करोल बाग, नई दिल्‍ली – 5

(साभार : स्‍मारिका : श्री धर्म गुरू स्‍वामी ज्ञान-स्‍वरूप जन्‍म शताब्‍दी एवं अ‍.भा. रैगर महासभा स्‍वर्ण जयन्ति समारोह एवम् चन्‍दनमल नवल कृत : ‘रैगर जाति का इतिहास एवं संस्‍कृति’)

Website Admin

BRAJESH HANJAVLIYA



157/1, Mayur Colony,
Sanjeet Naka, Mandsaur
Madhya Pradesh 458001

+91-999-333-8909
[email protected]

Mon – Sun
9:00A.M. – 9:00P.M.

Social Info

Full Profile

Advertise Here