समाज के प्रमुख अधिकारी

रैगर जाति में शिक्षा एवं प्रमुख अधिकारी

शिक्षा के बिना कोई भी समाज विकास नहीं कर सकता है । शिक्षा से व्‍यक्ति की सोचने की शक्ति बढ़ती है तथा ज्ञान में वृद्धि होती है । अशिक्षित व्‍यक्ति अज्ञान और मूढ़ होता है । जो भी समाज आगे बढ़ा है, वो शिक्षा के बल पर ही आगे बढ़ा है । शिक्षा के अभाव में रैगर जाति के विकास की कल्‍पना नहीं कर सकते ।

स्‍वतन्‍त्रता से पूर्व अंग्रेजों ने भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए कोई कार्य नहीं किया । अंग्रेज जानते थे कि शिक्षा से भारतीयों में राजनैतिक चेतना उत्‍पन्‍न होगी और अंग्रेजी शासन के लिए खतरा उत्‍पन्‍न करेंगे । इसलिए उन्‍होंने अपने प्रशासन को चलाने के एि जिनी शिक्षा की आवश्‍यकता थी, उतना ही प्रसार किया । उनको कामकाज चलाने के लिए बाबू तैयार करने थे । इसलिए शिक्षा का प्रबंध भी उसी स्‍तर का किया । सरकार की सुनियोजित शिक्षा व्‍यवस्‍था के अभाव में मंदिरों तथा ईसाई मिशनरियों ने भारत में शिक्षा का थोड़ा बहुत प्रसार किया । सरकारी शिक्षण संस्‍थाएं बहुत कम थी । शिक्षा का महत्‍व भी लोग नहीं समझते थे । इसलिए अपने व्‍यवसाय करने तथा हस्‍ताक्षर करना सीखने तक ही शिक्षा में रूचि लेते थे । ऐसे हालात में पिछड़ी जातियों की शिक्षा स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है । रैगर जाति में शिक्षा का प्रचार बहुत कम था । इसके मुख्‍यत: दो कारण थे । एक कारण तो शिक्षण संस्‍थाओं का नितान्‍त अभाव था । यदि कोई रैगर अपने बच्‍चों को पढ़ाना भी चाहता था तो पढ़ाने के लिए स्‍कूलों की सुविधा सुलभ नहीं थी । दूर पढ़ाने के लिए भेजना उनके लिए संभव नहीं था । दसरा कारण रैगरों की आर्थिक माली हालत थी । गरीबी के कारण उनकी संतान जैसे ही बड़ी होती और थोड़ा बहुत कमाने योग्‍य हो जाती वे उन्‍हें धंधे में डाल देते थे । वे अपनी संतानों को पढ़ाने की बजाय घर की आय बढ़ाने में लगाते थे । स्‍त्री शिक्षा की स्थिति तो और भी बुरी थी । रैगर जाति में आजादी के 17 वर्षों बाद तक एक भी महिला ने आठवीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण नहीं की । रैगर जाति में सर्वप्रथम जसपतराय गिरधर ने मैट्रिक परीक्षा पास की थी । स्‍वतंत्रता पूर्व दिल्‍ली में डॉ. खूबराम जाजोरिया, नवल प्रभाकर, देवेन्‍द्रनाथ खटनावलिया तथा गौतमसिंह शक्‍करवाल आदि शिक्षित लोगों में थे । राजस्‍थान में सूर्यमल मौर्य, हजारीलाल पंवार, जयचन्‍द मोहिल, कंवरलाल जेलिया तथा बिहारीलाल जागृत वगैरा पढ़े लिखे लोगों में गिने जाते थे । इस तरह स्‍पष्‍ट है कि रैगर जाति की शैक्षणिक स्थिति दयनीय थी ।

आजादी के बाद भारत सरकार ने शिक्षा की वृहत् योजना बनाई । बड़े पैमाने पर स्‍कूल और विद्यालय खोले । अनुसूचित जातियों तथा जन जातियों के छोत्रों केा प्रोत्‍साहन देने के लिए नि:शुल्‍क शिक्षा की व्‍यवस्‍था की । उन्‍हें अनेकों प्रकार के अनुदान और आर्थिक सहायता दी । रैगर जाति ने भी इन सुविधाओं का लाभ उठाना प्रारम्‍भ किया । रैगर जाति के संत महात्‍माओं की प्रेरणाओं त‍था जातिय सम्‍मेलनों में रैगरों को अपने बच्‍चों को पढ़ाने भेजने पर बल देने का अच्‍छा परिणाम निकला । आ‍ज स्थिति यह है कि हर रैगर में इतनी चेतना आ गई है कि अपने लड़कों को स्‍कूल भेजता है । मगर स्‍त्री शिक्षा की स्थिति में विशेष सुधार नहीं हुआ है । मीरां कंवरिया, किस्‍तूरी सालोदिया, सोहन सालोदिया वगैरा कुछ नाम है जिन्‍होंने एम.ए. किया है । राजस्‍थान और दिल्‍ली में कुछ रैगर लड़किए व्‍याख्‍याता तथा डॉक्‍टर आदि पदों पर भी लगी हुई हैं । मगर महिला शिक्षा की स्थिति पर समग्र रूप से विचार करने पर नतीजा यह निकलता है कि रैगर अपनी लड़कियों को पढ़ाने में रूचि नहीं लेते हैं । इसके पीछे कई कारण हैं । लड़कियों को पराया धन समझकर पढ़ाने में कोई लाभ नहीं समझते । कई लोग आज भी रूढ़िवादी परम्‍पराओं में जकड़े होने की वजह से लड़की बड़ी होने पर पढ़ने भेजना इज्‍जत के खिलाप समझते हैं । कई लोग यह भी सोचते हैं कि लड़की से नौकरी तो करवाना नहीं है । फिर पढ़ाने की क्‍या जरूरत है । बाल विवाह भी इसमें एक कठिनाई है । उनके सामने यह भी कठिनाई आती है कि गांवों में लड़कियों के लिए पृथक कन्‍या स्‍कूलों की सुविधा सर्वत्र उपलब्‍ध नहीं है । रैगर जाति में स्‍त्री शिक्षाके पिछड़ेपन के कई कारण हो सकते है़ मगर यह निर्विवाद रूप से सत्‍य है कि बिना स्‍त्री शिक्षा के रैगर समाज का सम्‍पूर्ण विकास नहीं हो सकता । एक कहावत है कि पुरूष पढ़ता है तो स्‍वयं सुधरता है मगर स्‍त्री पढ़ती है तो पूरा परिवार सुधरता है । रैगर जाति वास्‍तव में सुधार और उत्‍थान चाहती है तो स्‍त्री शिक्षा के महत्‍व को समझना होगा और हर रैगर को अपनी लड़की को शिक्षा दिलानी होगी । शहरों में समाज कल्‍याण विभाग के कन्‍या छात्रावास हैं जहाँ फीस, पुस्‍तकें, कपड़े, तेल, साबुन आदि तमाम सुविधाएं मुफ्त मिलती है । रैगरों को अपनी लड़कियों को ऐसे छात्रावासों में अवश्‍य भेजना चाहिए । सरकारी सुविधाओं के अलावा रैगर समाज ने भी रैगर छात्रा-छात्राओं के लिए विशष सुविधाएं देने को प्रयास किया है । जनवरी 1929 में दिल्‍ली के स्‍थानीय रैगरों के सहयोग से ‘आर्य कन्‍या पाठशाला’ की स्‍थापना की गई जो नारी शिक्षा की दृष्टि से लाभप्रद सिद्ध हुई । ‘श्री स्‍वामी मौजीराम सत्‍संग सभा’ ने दिल्‍ली में विष्‍णु मंदिर में प्रौढ़शिक्षा का लगभग सालभर कार्यक्रम चलाया । ‘दिल्‍ली प्रांतीय रैगर शुभ चिंतक परिषद्’, ‘रैगर विद्यार्थी परिष्‍द’ आदि संस्‍थाओं का ध्‍येय प्रौढ़ शिक्षा रहा । दिल्‍ली प्रांतीय रैगर पंचायत ने भी आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की भरपूर मदद की । ‘रैगर शिक्षित समाज’ नामक संस्‍था ने भी ग्रीष्‍मकाल में नि:शुल्‍क शिक्षा देने की व्‍यवस्‍था की तथा प्रतिभावान छात्रों को पारितोषिक देकर उनको प्रोजेक्ट दिया । राजस्‍थान में आत्‍माराम लक्ष्‍य छात्रावास रींगस तथा ज्ञान गंगा छात्रावास, जोधपुर में प्रारम्‍भ किये गये । रैगरों में काफी लोग उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त कर सरकारी नौकरियों में उच्‍च पदों पर पहुँचे हैं । आज सरकारी सेवाओं में अखिल भारतीय एवम् प्रांतीय स्‍तर के सर्वेच्‍च पदों पर रैगर नियुक्‍त हैं और सफलतापूर्वक अपने दायित्‍वों को निभा रहे हैं ।

प्रमुख अधिकारी

रैगर जाति में 8 आई.ए.एस., 11 आई.पी.एस., 23 आर.ए.एस., 13 आर.पी.एस., 4 जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश, 4 भारतीय वन सेवा तथा 2 भारतीय राजस्‍व सेवा में हैं । राजस्‍थान सहकारिता सेवा में 1 एडिशनल रजिस्‍ट्रार 1 जोइन्‍ट रजिस्‍ट्रार तथा 2 डेप्‍युटी रजिस्‍ट्रार हैं । इनके अलावा विश्‍वविद्यालय में 1 प्रोफेसर तथा 1 सहायक प्रोफेसर है । रैगर समाज में डॉक्‍टर, वकील और इंजीनियर इतने हैं कि उनकी संख्‍या बताना मुश्किल है । बैंक सेवाओं मे मैनेजर के पद पर कई रैगर नियुक्‍त हैं । सब से अधिक शिक्षा विभाग में सेवारत हैं जो स्‍कूल और कॉलेजों में अध्‍यापन का कार्य कर रहे हैं । इस तरह रैगरों ने अपनी योग्‍यता से सरकारी विभागों में उच्‍च पदों पर नियुक्तियें पाई हैं तथा अपनी सेवाएं देश, समाज और सरकार को दे रहे हैं । समाज के सेवारत समस्‍त अधिकारियों की सूची देना संभव नहीं है । केन्द्रिय एवं राज्‍य स्‍तरीय सेवाओं में नियुक्‍त रैगर अधिकारियों की सथासंभव उपलब्‍ध सूची दी जा रही है ।

नामपदजन्‍म दिनांकमूल निवासी
श्री विनाद जाजोरियाIAS दिल्‍ली दिल्‍ली
श्री टी.आर. वर्माIAS राजस्‍थान चौथ का बरवाड़ा (राज.)
श्री उमराव सालोदियाIAS राजस्‍थान निवाई (राज.)
श्री गंगारामIAS गुजरात गौनेर (राज.)
श्री जयनारायण कांसोटियाIAS मध्‍य प्रदेश कुचामन शहर (नागौर)
श्री नरेन्‍द्र मोसलपुरियाIAS दिल्‍ली दिल्‍ली
श्री जी.एल. वर्माIAS राजस्‍थान पीथमपुरी (सीकर)
श्री ज्ञानचंद सेवलियाIAS दिल्‍ली दिल्‍ली
श्री सुवालाल रछोयाIAS राजस्‍थान उदयपुरवाटी (सीकर)
श्री रामनिवास मोरलियाIAS राजस्‍थान देवली (टोंक)
श्री बी.एल. नवलIAS राजस्‍थान सतलाना (जोधपुर)
श्री यादराम धूड़ियाIPS दिल्‍ली दिल्‍ली
श्री राजेन्‍द्र प्रसाद गाडेगांवलियाIPS कर्नाटक दिल्‍ली
श्री परमानन्‍द रछोयाIPS राजस्‍थान दिल्‍ली
श्री एस.के. दासIPS मध्‍य प्रदेश नेछवा (राज.)
श्री बलवंतराय निर्मलIPS मध्‍य प्रदेश लसा‍ड़िया (राज.)
श्री बनवारीलाल अटलIPS मध्‍य प्रदेश जोधपुरा (राज.)
श्री ज्ञानचंद चांदोलियाIPS गुजरात मेड़ (राज.)
श्री मुकेश गाडेगांवलियाIPS दिल्‍ली दिल्‍ली
श्री इन्‍द्रजीत नोगियाIPS दिल्‍ली दिल्‍ली
श्री प्रमोद वर्माIPS मध्‍य प्रदेश चौथ का बखाड़ा (राज.)
श्री नाथूलाल मौर्यIPS राजस्‍थान जयपुरा (राज.)
श्री चिरंजीलाल बाकोलियाIncome Tax Comm. दिल्‍ली
श्री सी.एम. चान्‍दोलियाआयुक्त कस्टम मेड़ (राज.)
श्री रमेशचन्‍द रैगरIFS (भारतीय वन सेवा) छत्‍तीसगढ़ राज.
श्री रमेश कुमार रैगरIFS राजस्‍थान लासल (राज.)
श्री के.सी. शक्‍करवालIFS राजस्‍थान जयपुर
श्री टी.सी. वर्माIFS राजस्‍थान राजस्‍थान
कुमारी सुमन कांसोटियाIFS (भारतीय विदेश मंत्रालय)29/04/1986कुचामन सीटी (नागौर)
श्री देवबक्‍स रैगरजिला एवं सत्र न्‍यायाधीश बगरू
श्री मांगीलाल नोगियाजिला एवं सत्र न्‍यायाधीश दवगढ(जिला राजसमन्‍द)
श्री प्रयागचन्‍द वर्माजिला एवं सत्र न्‍यायाधीश हस्‍तेड़ा
श्री पूरणमल जलुथरियाजिला एवं सत्र न्‍यायाधीश आंधी
श्री आर.पी. निडरRAS दिवराला (सीकर)
श्री छोगालाल कंवरियाRAS ब्‍यावर
श्री पंकज मनुRAS बलेसर (जयपुर)
श्री उदाराम कुरड़ियाRAS नागौर
श्री एम.एल. भट्टRAS ब्‍यावर
श्री बृजेश चांदोलियाRAS मेड़ (जयपुर)
श्री एच.आर. अटलRAS मानपुरा माचेड़ी (जयपुर)
श्री रामस्‍वरूप वर्माRAS दिवराला (सीकर)
श्री पृथ्‍वीराज आर्यRAS राश्मि (चित्‍तौड़गढ)
श्री बिशनलाल सुनारियाRAS किशनगढ (अजमेर)
श्री कजोड़मल दुड़ियाRAS दौलतपुरा (जयपुर)
श्री भंवरलाल जाटोलRAS करणीपुरा (सीकर)
श्री चतुर्भुज हिंगोनियाRAS श्रीनगर (अजमेर)
श्री ज्ञानचन्‍द रैगरRAS श्‍यामपुरा (जयपुर)
श्री राजेन्‍द्र कुमार वर्माRAS पीथमपुरी (सीकर)
श्री रामलाल देवतRAS भैंसवा (जयपुर)
श्री भगवान रामRAS खूड़ (सीकर)
श्री सुरेशकुमार नवलRAS छोटी खाटू (नागौर)
श्री नाथूलाल वर्माRAS श्‍योदासपुरा (जयपुर)
श्री चन्‍दनमल नवलRPS सतलाना (जोधपुर)
श्री जी.एल. वर्माRPS हासपुर (जयपुर)
श्री जयनारायण शेरRPS आंवा (टोंक)
श्री महेन्‍द्र हिंगोनियाRPS जयपुर
श्री शंकरलाल सौंकरियाRPS जयपुर
श्री गणपतलालRPS ब्‍यावर
श्री प्रेमचन्‍द कुरड़ियाRPS जयपुर
श्री शिवनाथसिंह कुरड़ियाRPS नागौर
श्री रमेश मौर्यRPS जयपुर
श्री रामजीलाल चन्‍देलRPS  
श्रीमती सीता उज्‍जैनियाRPS कुचान शहर (नागौर)
श्री अनुकृति उज्‍जवलRPS  
श्री दिनेश गढवालRJS राजस्‍थान राजस्‍थान
डॉ. राजेश पिंगोलियाDSP जयपुर
श्रीमती राखी पिंगोलियासंयुक्‍त कलेक्‍टर जयपुर
श्री लेखराजProfessor Delhi University
डॉ. किशोरीलाल रैगरAssociate Prof. JNVU Jodhpur
डॉ. केवल गोस्‍वामीProfessor AIIMS, New Delhi
डॉ. पदमसिंहDirector ICMR, New Delhi
श्री रूद्रदेव शक्‍करवालEngineer दिल्‍ली
श्री टी.सी. जाटोलS.E. बाड़मेर
श्री मिश्रिमल फुलवारियाS.E. बाड़मेर
श्री संतोष तांणगरियाS.E. रोहट (पाली)
श्री दयाराम मोसलपुरियाS.E. बिसलपुर (जवाई बांध)
श्री के.एल. कमलAdd. Regi. co-op. जयपुर
श्री जे.एल. कानवाLt. Colonel जोधपुर
श्री दुर्गालालMajor केकड़ी (अजमेर)
श्री सोहनलाल सिंगाड़ियाAdd. Director Edu. जैतारण (पाली)
श्री एन.एल. शेरPrincipal उदयपुर
श्री भंवरलाल जलूथरियाD‍istrict Education Officer उदयपुर
श्री केशव हिंगोनियाI.A.S.  जयपुर
श्री हेमंत हिंगोनियाI.R.S.  जयपुर
श्री दिनेश कुमार जलुथरिया Civil Judge(Junior)- Session & Distt court जयपुर
श्री रामरतन सौंकरियाRAS जयपुर
श्री सावरमल सौंकरियाRTS जयपुर
श्री राजेन्‍द्र कुमार बालोटियाACP (Deputy Director) Jaipur (9414204412)
Department of IT and Communication
 ब्‍यावर
श्री अंकुर कुमार झिंगोनियाIES Ind. Railway (Electronic and Communication)26-06-1983सिंगोद खुर्द, जयपुर
श्री सुरज मलIES (Electronic and Communication) Ind. Railways नागौर
श्री शंकरलाल झिंगोनियाManager(Mining)/S.E. (9413304555)01-01-1971सिंगोद खुर्द, जयपुर
श्री मदनलाल बालोटियाRJS (9571158751) भीनमाल, जालोर
श्री पियूष जैलियाRJS (91666 62040) गंगापुर, भीलवाड़ा
श्री रवि प्रकाश बाकोलियाRJS (94613 50578) नागौर

(साभार- चन्‍दनमल नवल कृत ‘रैगर जाति : इतिहास एवं संस्‍कृति’)

सभी रैगर बंधुओं से निवेदन है कि अगर यहाँ पर दिये गये अधिकारियों की सूची में कोई नाम नहीं हो तो हमे उचित माध्‍यम से सूचित करे । ताकि इसे पूर्ण किया जा सके ।

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