इन्टरनेट की दुनिया में रैगर समाज

‘‘इन्टरनेट की दुनिया में रैगर समाज’’

Kushal Chouhan

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कि, हम क्या कहना चाह रहे हैं । बात जब विकास की हो तो, विकास मे तकनीकी और सामाजिक विकास, सभी शामिल आते हैं ।

तकनीकी और सामाजिक परिवेश में आज बदलाव का दौर चल रहा है । जिसके कारण आज सामाजिक विकास के साथ-साथ तकनीकी में भी तेजी से बदलाव आया है । दुनिया छोटी हो गई है और सभी इस बात पर सहमत भी है । यह सभी सूचना प्रोद्योगिकी के विकास के कारण सम्भव हो पाया है ।

समाज मे एक नया मिडिया तन्त्र आ गया है । प्रिन्ट मिडिया, इलेक्ट्रोनिक मिडिया का नाम तो सुना था । अब इसमे एक नया मिडिया तंत्र आ गया है, जिसे हम सोशल मिडिया के नाम से जानते है । सोशल मिडिया मे फेसबुक का जमाना आ गया है, जिसने सभी को पीछे छोड़ दिया । आज घर-घर तक फेसबुक पहॅुच गया । जिसके कारण से इन्टरनेट की एक नयी दुनिया विकसित हो गई है । जिसका परिवार असीमित यानी पूरा संसार एक हो गया है । जिसमे ख़बरे मात्र सेकैण्ड भर में Like व Share कर दुनिया भर में पहुचाई जा रही है ।

यह चमत्कार इन्टरनेट की देन है । आज भी भारत जैसे पिछड़े देश मे इन्टरनेट एक महंगा सूचना सम्प्रेशण तंत्र है लेकिन सूचना-प्रोद्योगिकी तथा टेलिकम्यूनिकेशन के विकास ने इसे सस्ता बना दिया है । जिसकी वजह से आज देश में इन्टरनेट की पहुँच, मोबाइल के माध्यम से, हर व्यक्ति तक हो गई है । यह लाभ समाज के प्रत्येक तबके को मिलने लगा है, जिसमे रैगर समाज भी अछूता नही रहा है ।

सूचना-प्रोद्योगिकी की दुनिया मे रैगर समाज की बात करे तो सबसे पहले फेसबुक की याद आती है । सोशल नेटवर्किग साइट में रैगर समाज के उद्भव का श्रैय एक छोटे से ग्राम के मूल निवासी व हाल मूकाम मन्दसौर, मध्यप्रदेश के श्री ब्रजेश हंजावलिया को जाता है, जिन्होने रैगर समाज को फेसबुक पर, रैगर समाज का समूह बनाकर 22 हजार से अधिक रैगर बन्धुओं को एकजुट करने का एक सफल प्रयास किया है । जिसके कारण समाज की युवा पीढ़ी मे सामाजिक जागरूकता का प्रादुभाव हुआ है । जिसमे समाज के सभी वर्गों ने बढ़-चढ़कर अपनी एकजुटता का परिचय दिया । जिसमे महिलाऐं, बुजुर्ग सभी शामिल है ।

आज सोशल नेटवर्किग वेबसाईट पर रैगर समाज समुह की गिनती सर्वाधिक लोकप्रिय व वृहद समूह मे होने लगी है । रैगर समाज ने फेसबुक एक सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट है इसके नाम को सार्थक रूप से सिद्ध किया है । जो रैगर समाज भारत देश में अपनी पहचान खो रहा था, उसे फेसबुक के माध्यम से एक नयी पहचान देने तथा रैगर समाज में एक वेचारिक क्रांति लाने का श्रैय श्री ब्रजेश हंजावलिया को जाता है । जो बधाई के पात्र है ।

इसी कड़ी में एक कदम आगे बढकर, रैगर जाति के इतिहास को दुनिया के सामने लाने तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुचाने के लिए 27 जनवरी 2012 को इन्टरनेट की दुनिया मे ‘‘ www.theraigarsamaj.com ’’ के नाम से एक वेबसाईट की शुरूआत की । जो समाज के इतिहास के साथ-साथ सूचनाओं, वर्तमान गतिविधियों को रैगर समाज की आम जनता तक इन्टरनेट के माध्यम से पहुँचा रही है जिसके द्वारा युवा पीढ़ी मे सामाजिक जवाबदेहीता के साथ, अपने समाज के लिए गर्व की भावना भी पैदा हुई है । जो रैगर बन्धु पहले अपने आपको अहज महसूस करता था, वो आज इस दुनिया के ताने-बाने मे बड़ा चिर परिचित अदांज़ मे लोगों के सामने आ रहा है । आज उसे अपने आपको रैगर कहने और होने पर गर्व होने लगा है । रैगर समाज की वेबसाईट ने रैगर बंधुओं मे अपनी जाति के प्रति गर्व की भावना को पैदा किया है । सबसे अच्‍छी बात तो यह है इस वेबसाईट की सम्पूर्ण जानकारियां हमारी मात्र भाषा हिन्दी में है । जो सभी वर्गों के लिए पढ़ने और समझने में सहज है ।

आप जानते होंगे कि ‘www.theraigarsamaj.com’ की शुरूआत 27 जनवरी, 2012 को हुई थी । इसलिए यह हम सबके लिए हर्ष की बात है कि आज ‘www.theraigarsamaj.com’ के दो साल पूरे हो गए । तब से लेकर अब तक न केवल इसकी निरंतरता हम ने कायम रखी बल्कि गुणवत्ता के स्तर पर भी विशेष ध्‍यान दिया । यही सोच कर ‘रैगर समाज की ’ वेबसाईट को शुरू किया गया कि समाज को आज के इस आधुनिक युग में इन्‍टरनेट की मुख्यधारा से जोड़े ओर रैगर सरोकारों से जुड़ी खबरों व मुद्दों को प्रमुखता से प्रकाशित करें और उस पर गंभीर विमर्श हो । साथ ही 50 लाख से अधिक की जनसंख्या वाली रैगर जाति को इंटरनेट पर प्रभावी सम्मान दिलाने के लिए सार्थक प्रयास हो । इस दिशा में श्री हंजावलिया जी द्वारा ईमानदारी से प्रयास किया, इसलिए महज दो साल की अवधि में ही रैगर समाज की यह वेबसाईट समाज का चर्चित मंच व वैकल्पिक मीडिया का प्रखर प्रतिनिधि बन गया है । भाषा, विषयवस्तु और विविधता की दृष्टि से इसने इस वेबसाईट को समाज की सबसे बड़ी वेबसाईट होने का प्रमुख स्थान मिला है । यह हमारे लिए गर्व की बात है ।

इस वेबसाईट में रैगर समाज के इतिहास, समसामयिक घटनाऐं, सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ समाज के विवाह योग्य वर-वधू के लिए भी बेहतर जानकारी बड़े ओटोमेटिक तरीके से उपलब्ध कराती है । वर्तमान में रिश्‍ते के लिए लगभग 500 प्रोफाइल इस वेबसाईट पर रजिस्ट्रर्ड है । यह सेवा संचालक द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है । इस सुविधा के फलस्वरूप अनेक रैगर समाज के अविवाहित युवक-युवतियों ने अपने जीवन साथी का चुनाव कर विवाह बन्धन में बन्ध गये है । वेबसाईट को ज्ञानवर्धक बनाने के लिए रैगर समाज के पत्रकार, लेखकों व बुद्धिजीवी द्वारा रचित कई लेख भी दर्शाये गये है, जिससे रैगर समाज के लेखों के अतिरिक्त अम्बेडकरवादी, सामाजिक, ज्ञानवर्धक लेख आदि अनेक लेख शामिल है, जिससे कि समसामयिक मुद्दो पर प्रकाश डाला जा सके ।

वेबसाईट एक ही वर्ष मे, इतनी अधिक लोकप्रिय हो गई है कि, प्रतिदिन सेकड़ो लोग, वेबसाइट देखते है, जिसमे अमेरिका, कनाडा, नोर्वे, सऊदी अरब, कुवैत, नेपाल, जापान, यूरोप आदि को मिलाकर लगभग 80 से अधिक देशों से प्रतिदिन वेबसाईट पर रैगर समाज के सजातीय व अन्य समाज के बन्धुओं द्वारा पढ़ा जाता है । वेबसाईट के उपयोगकर्ताओं में दिन दो गुनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है । हमारे रैगर समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों भी इस वेबसाईट को उपयोग में ले रहे है व इस वेबसाईट में जोडे गए लेखों को पढ रहे है । एक सामान्य सर्वे में ये पता चला है कि यह रैगर समाज की वेबसाईट भारत के किसी भी समाज की सबसे बडी वेबसाईट है यह हमारे लिए गर्व की बात है ।

आपको यह भी विदित होगा कि पिछले दिनों ‘’ 23 जून 2013 से रैगर समाज के अविवाहित युवक युवतियों के लिए हमनें नि:शुल्‍‍क रैगर वेवाहिकी वेबसाईट का शुभारम्‍भ किया है जोकि अन्‍य प्रोफेशनल वेबसाईट की तरह बनाई गई है ताकि समाज के बंधु इसके माध्‍यम से रैगर समाज के ही युवक युवतियों का चयन कर सके ।

वेबसाईट का पिछले वर्ष मे लगभग एक लाख लोगों ने विजिट किया है । वेबसाइट पर कुल 360 समाज की अलग अलग प्रकार की जानकारियों के वेब पेज है जिसेमें से प्रतिदिन 1000 पेज अलग-अलग ओपन किये जाते है तथा वेबसाइट को प्रतिदिन औसतन 179 नये यूजर देखते है । कुल मिलाकर वेबसाईट के सारे पेज लगभग 10 लाख से भी अधिक बार ओपन हुए है । वेबसार्इट मे रैगर समाज के ऐतिहासिक महत्व की फोटो गैलेरी भी है जो, रैगर समाज के इतिहास को हमेशा जीवंत रखती है । वेबसाईट के भारत के बाहर, विदेशों मे सर्वाधिक यूजर, लगभग 15000 अमेरीका में है, जो वेबसाइट की सामग्री को पढते है ।

इस इन्‍टरनेट की नयी दुनिया मे, नयी पहचान देने का श्रैय श्री ब्रजेश हंजावालिया को जाता है, इसलिए वे धन्यवाद के पात्र है । समाज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है तथा समाज के विकास मे एक मील का पत्थर है । साथ ही दी रैगर समाज डॉट कॉम को इस मुकाम पर पहुंचने में जिनका सर्वाधिक योगदान रहा है, वे हैं इसके प्रबंधक व संस्‍थापक श्री ब्रजेश हंजावलिया । जब-जब इस वेबसाईट के लिए आर्थिक जरूरत हुई या फिर तकनीकी संसाधन की, आपने सहर्ष इसे पूरा करने में जुट गए, मैं आपके प्रति हार्दिक आभार व्‍यक्‍त करता हूं । इसके साथ ही मैं रैगर समाज की इस वेबसाईट के सुधी पाठकों एवं विद्वान लेखकों के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं कि वे समाज के इस वैकल्पिक मीडिया को साकार करने में हमारे हमसफर बने । आशा है हमेशा की तरह सुधी पाठकों का सहयोग व स्‍नेह हमें मिलता रहेगा ।

आपने अपने स्वयं के नीजी आर्थिक व्यय से भारतीय स्टेट बैंक मे क्लर्क रहते हुए उन्होने समाज हीत मे यह बेहतरीन कारनामा मात्र 28 वर्ष की आयु में कर दिखाया है । इस तरह के कारनामा, जो देश के रैगर समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लिए भी एक आदर्श आधार बना रहेगा । इनकी कड़ी मेहनत और हौसले को रैगर समाज नमन् करता है ।

लेखक: कुशाल चन्द्र रैगर, एडवोकेट
M.A., M.COM., LLM.,D.C.L.L., I.D.C.A.,C.A. INTER–I,
अध्यक्ष, रैगर जटिया समाज सेवा संस्था, पाली (राज.)
माबाईल नम्‍बर 9414244616

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