घड़ी समय ही नहीं प्रेरणा का भी स्रोत है….

घड़ी के बारे में तो सभी जानते ही होंगे की घड़ी किस उद्देश्य से बनाई गई है । वैसे तो घड़ी निर्माण कर्ता घड़ी को समय देखने के उद्देश्य से बनाया है जिससे कि सरलता से समय को मापा जा सके ।

पुराने समय में:-

पुराने समय में दिन में समय देखने के लिए सूर्य का झुकाव से पता लगाते थे और रात को तारे का झुकाव से समय का पता लगाते थे जिससे सही समय को समझने में कभी -कभी कठिनाई भी हो जाती थी। इस कठिनाई को देखते हुए हमारे वैज्ञानिक ने घड़ी का निर्माण किया है जिससे हमें सही समय ज्ञात हो जाता है ।

आज के दौर में:-

अब सूर्य और तारे को देखने का जरूरत नहीं रहा अब घर बैठे बिछावन पर लेटे हुए भी चलते हुए भी, अपनी कलाई में घड़ी बांधे हुए को देखकर, समय का पता लगा लेते हैं।

तो हम लोग घड़ी को समय ज्ञात करने का उद्देश्य से अपने घर के दीवार से टाँगते हैं और कलाई में बांधते हैं ।

लेकिन कभी आपने घड़ी की बात सुनने और समझने की कोशिश की है ?

घड़ी एक अच्छे शिक्षक हैं । कैसे ?

आप अपने घर में दीवार से लगे घड़ी और कलाई में लगे घड़ी को गौर से देखें और समझें तो आपको सही ज्ञान का एहसास होगा।घड़ी एक अच्छी टीचर की तरह आपको प्रेरणा देती हैं और बतलाती हैं कि समय बहुत ही मूल्यवान है। समय का पाबंद मैं हूँ , इसीलिए मुझे कोई कलाई में तो कोई अपने घर के मुख्य द्वार में लगाकर रखते हैं और हमें समय को समझने के लिए देखते रहते हैं ।

घड़ी अपनी सच्ची कहानी क्या बखान करती है :-

जब मुझे भूख लगती है,तो मैं कार्य से असमर्थ होने लगता हूँ। और जिसके कारण मैं धीरे -धीरे चलने लगता हूँ। यह देख मेरे मालिक समझ जाते हैं कि इसे भूख लगी है एनर्जी की जरूरत है तो फिर मुझे इनर्जी के रूप में नई बैटरी (cell) लगा देते हैं, जिससे हमें फिर से नवीन एनर्जी का एहसास होने लगता है और मैं फिर समय से चलने लगता हूँ।

जब मैं समय का पाबंद नहीं रहता हूँ , तो मुझे एक रद्दी की टोकरी में डाल दी जाती है,जो कि मैं कचरे का ढेर में जाकर शामिल हो जाता हूँ । जहाँ कि मेरा कोई मूल्य ही नहीं होता मेरा मूल्य समय को लेकर ही है।

तो हमारे अच्छे दोस्तों आप भी हमारे ही तरह समय की पाबंदी को समझें अगर आप समय की पाबंदी को समझते हैं तो आपका छवि समाज, प्रखंड, जिला, राज्य, देश और विदेश में भी दूसरे का प्रेरणा स्रोत बनेगी।

आप अपने समाज में देखते होंगे की जो समय का पाबंद नहीं है, जो समय को नहीं समझता है। वह एक पशु के समान दिखता है। उसे आप देखेंगे, ना ही खाने का समय, ना ही स्नान करने का समय ना ही, काम करने का समय।

उद्देश्य:-

कोई उद्देश्य ही नहीं उसके पास होता है और जिसके पास उद्देश्य नहीं है, वह पशु के समान है। उसका चेहरा भी ठीक वैसा ही दिखता है। उसका परिवार बहुत ही कष्ट में जीवन को व्यतीत करते हैं। उसे समय से अच्छे भोजन नसीब नहीं हो पाते हैं। जिसके कारण परिवार, बच्चे में कुपोषण का शिकार हो जाता है। उसकी दुनियाँ सीमित होती है।
बुरा परिणाम :-
इतना कष्ट में जीवन होने के बावजूद भी, जो समय को नहीं समझ पाता है, उसका अंततः पतन हो जाता है। वह कहीं भी रोड छाप बनकर अपनी झुग्गी -झोपड़ी बनाकर भूखे-प्यासे जीवन व्यतीत करते -करते अपने जीवन को समाप्त कर लेता है।

अच्छा परिणाम :-

लेकिन वह जो अपने घर या कलाई में बँधी घड़ी से जो प्रेरणा लेकर घड़ी का ही सच्चा साथी बन कर जो चलता है। उसका दिन प्रतिदिन उन्नति ही उन्नति होती जाती है और वह एक दिन टाटा, बिरला और मुकेश अंबानी को भी पीछे छोड़ आगे निकल जाता है।

इस प्रकार वह समाज, प्रखंड, जिला, राज्य और देश क्या वह विदेश में भी अपना छवि लहराता है। उसका परिवार बच्चे भी इस प्रेरणा को लेकर आगे की ओर निकलते रहते हैं। पीछे कभी मुड़कर देखता नहीं है।उसका जीवन स्वर्ग के समान होता है। क्या खाना है ? क्या पीना है ? कहाँ सोना है ? कैसे चलना है ? सारी बातें पूरे हटके होती है ।उसका जीवन एक कुशल राजा की तरह होता है।

सुझाव :-

इसलिए दोस्तों! घड़ी को एक घड़ी ही ना समझे। एक सच्चा मित्र समझे जो कि आपके घर में दीवार से लटक-कर, आपकी कलाई में बंध कर आपको बार-बार प्रेरणा देती है कि तुम मेरे ही तरह आगे की ओर बढ़ते जाओ पीछे मत मुड़ो फिर देखो तुम पाओगे की सारे आदमी तुमको अपने हृदय में जगह दे रहे हैं ।

किसी भी कार्य को सही अंजाम तक पहुँचाने में समय का कठोरता से पालन करना अनिवार्य है।

“You have to reach at the appointed time without fail , if you are not dead”. –Shrii P . R. Sarkar.

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