Brajesh Hanjavliya

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रैगर जाति में एक जमाने के रीति रिवाजो को जानने के लिये यह आवश्यक है कि इस समाज के विभिन्न संगठनो व समाज सुधारको द्वारा प्रकाशित सुधारो का अध्ययन किया जाये। इन रीति रिवाजो के विस्तृत अध्ययन करने के लिये मेने दिल्ली में रहने वाले रैगर जाति के समाज सुधारको द्वारा प्रकाशित र्खचीले रीति रिवाजो...
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अखिल भारतीय रैगर महासभा निर्वाचन प्रोविजनल मतदाता सूची 2019 Click this link to Download List. Final List Mahasbha-converted Full Final 28 Jan 2019 बी एल जाटोलिया (वर्मा) (आर.ए.एस. सेनि.) निर्वाचन अधिकारी मो. 9414009951 निवेदन है कि मतदाता सुची में नाम, पता में अशुद्धि हो, मतदाता स्वर्गवासी हो गया हो, इत्यादि जैसे पता अपूर्ण हो, पिन...
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आगामी दिसम्बर में राजस्थान विधानसभा की 200 सीटो पर चुनाव होने है l  प्रमुख राजनीतिक पार्टियाँ रैगर समाज को छोड़कर अन्य सभी समाज के वोटरों को रिझाने के लिए अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में लगी हुई है । जबकि राजस्थान प्रदेश में रैगर जाति अनुसूचित जाति की सबसे बड़ी जाति होते हुए भी प्रदेश में...
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प्रस्तावना: गुरु-शिष्य परंपरा सदियों से हमारे देश में चली आ रही है। गुरु शिष्य परम्परा के अंतर्गत गुरु अपने शिष्य को शिक्षा देता है। बाद में वही शिष्य गुरु के रुप में दूसरों को शिक्षा देता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। अब हम गुरु शब्द का अर्थ जानेंगे। ‘गु’ शब्द का अर्थ...
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[vc_row type=”in_container” full_screen_row_position=”middle” scene_position=”center” text_color=”dark” text_align=”left” overlay_strength=”0.3″][vc_column column_padding=”no-extra-padding” column_padding_position=”all” background_color_opacity=”1″ background_hover_color_opacity=”1″ column_shadow=”none” width=”1/1″ tablet_text_alignment=”default” phone_text_alignment=”default” column_border_width=”none” column_border_style=”solid”][image_with_animation image_url=”4390″ alignment=”” animation=”Fade In” box_shadow=”none” max_width=”100%”][/vc_column][/vc_row]
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जनगणना के आंकड़े सही होते हैं। जरा आप आगे दिये गये 18 वीं सदी ईस्वी के जनगणना आंकड़ों पर विचार कीजिये। क्योंकि वो आंकड़े सामान्यवर्ग के अधिकारियों और प्रगणकों द्वारा एकत्रित किये गए थे, जिनमें जातिगत ऊँच-नीच की भावना पूर्णतया भरी हुए थी। अतः उनके विरुद्ध यह आरोप नहीं लगाया जा सकता है कि उनके द्वारा...
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महात्मा बुद्ध को उनके अनुयायी ईश्वर में विश्वास न रखने वाला नास्तिक मानते हैं। इस सम्बन्ध में आर्यजगत के एक महान विद्वान पं. धर्मदेव विद्यामार्तण्ड अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “बौद्धमत एवं वैदिक धर्म” में लिखते हैं कि आजकल जो लोग अपने को बौद्धमत का अनुयायी कहते हैं उनमें बहुसंख्या ऐसे लोगों की है जो ईश्वर और...
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माना जाता है कि भगवान गौतम बुद्ध की ज्ञान की खोज उस समय शुरू हुई जब उन्होंने एक ही दिन में तीन दृश्य देखे. पहला- एक रोगी व्यक्ति, दूसरा- एक वृद्ध और तीसरा- एक शव. जीवन का यह रूप देखकर हर तरह की सुख सुविधा से संपन्न जीवन को छोड़कर राजकुमार सिद्धार्थ गौतम जंगल की...
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